पर पत्नी को खुश रखने और घर के अंदर व बाहर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। यह टिप्पणी दहेज हत्या के मामले में पति को तीन साल कैद की सजा सुनाते हुए की है। अदालत ने पति को पत्नी पर क्रूरता करने का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने श्रीराम कॉलोनी निवासी अशरफ अली को पत्नी रेणु को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने 21 अक्तूबर को दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि दोषी ने दरिंद्र की तरह कृत्य किया और रोजाना पत्नी से क्रूरता की।
पेश मामले में रेणु को 100 सौ फीसदी जली हुई हालत में 19 मई 2012 अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान रेणु ने 20 मई 2012 को दम तोड़ दिया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक शख्स जब किसी महिला को शादी करके अपने घर लाता है तो उस पर पत्नी को खुश करने और घर के अंदर व बाहर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। दोषी ने इस विश्वास को तोड़ा है और पत्नी को रोजाना पीट कर उससे क्रूरता की।
अदालत ने अशरफ अली को खुदकुशी के लिए विवश करने के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि पीड़िता के जलने की मात्रा से साफ है कि यह मामला खुदकुशी से कहीं ज्यादा बढ़कर है।
अभियोजन के मुताबिक पीड़िता को जली हुई हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। नादिरा बीबी ने अपने दामाद अशरफ अली पर बेटी को पीटने व क्रूरता का आरोप लगाया था।
पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने दिसंबर 2012 में अशरफ अली को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने अशरफ अली पर दहेज प्रताड़ना व खुदकुशी के लिए विवश करने के तहत मामला दर्ज किया था।