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हादसे में मां की मौत, बच्चों को 4 लाख मुआवजा

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दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के मामले में उसके नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का बीमा कंपनी को निर्देश दिया है।
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खास बात यह है कि आदेश उस बीमा कंपनी को दिया गया है जिसके साथ उसके पति की बाइक का बीमा था। दरअसल महिला के पति की बाइक की पैकेज पॉलिसी थी जिसमें बाइक पर पीछे बैठने वाली सवारी भी कवर होती है।

कड़कड़डूमा जिला अदालत की एमएसीटी जज किरण बंसल ने नौ जुलाई को मृतक रेखा के दो नाबालिग बच्चों को 4,17,500 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को दिया है।
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बाइक पर ली थी पैकेज पॉलिसी

इस राशि पर नौ फीसदी की दर से ब्याज भी दिया जाना है। यह राशि दोनों बच्चों को बराबर हिस्से में दी जाएगी।

याचिका पर बहस करते हुए वकील प्रदीप शर्मा ने कहा कि इस मामले में टक्कर मारने वाली बाइक और उसका चालक पकड़ा नहीं गया है। मृतका की मौत से उसके बच्चों प्रेम व स्नेह का नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति होनी चाहिए। रेखा के पति की हादसे में कोई गलती नहीं है।

इस हालात में उसके बच्चों को मुआवजा मिलना चाहिए क्योंकि उसके पति की बाइक पर पैकेज पॉलिसी ली गई थी जिसमें पीछे बैठने वाली सवारी भी कवर होती है।
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ऐसे हुआ था हादसा

पेश मामले के अनुसार झिलमिल कॉलोनी निवासी रेखा, 4 मई 2012 को अपने पति देवनाथ के साथ बाइक से गाजियाबाद जा रही थी। एक अज्ञात बाइक ने देवनाथ की बाइक को सूर्या नगर रेड लाइट पर टक्कर मार दी थी।

इस हादसे में रेखा की मौत हो गई थी लेकिन दोषी बाइक चालक पकड़ा नहीं जा सका था। इस मामले की एफआईआर नहीं हुई थी, पुलिस ने केवल डीडी इंट्री की थी।

हादसे के बाद रेखा के बच्चों ने अपनी दादी जालिया देवी के माध्यम से याचिका दायर मुआवजा दिलाने की मांग की थी। मुआवजे की याचिका में बीमा कंपनी के अलावा देवनाथ को भी पार्टी बनाया गया था।
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