अदालत ने सीजोफ्रेनिया से पीड़ित रहे पति को मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) से घर ले जाने और उसकी देखभाल करने का निर्देश महिला वकील को दिया है।
अदालत ने यह निर्णय इहबास के निदेशक के उस पत्र के आधार पर सुनाया, जिसमें कहा गया था कि पीड़ित अब तकरीबन ठीक हो चुका है और उसे अब घर ले जाया जा सकता है।
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कड़कड़डूमा अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने एमएम कोर्ट के 28 फरवरी 2013 के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि उक्त शख्स भविष्य में अपनी पत्नी से क्रूरता करेगा।
इस आशंका के मद्देनजर उसे हमेशा इहबास में रखना उसके प्रति बड़ी क्रूरता होगी, क्योंकि इलाज के दौरान उसने सकारात्मक व्यवहार किया है।
बता दें कि मयूर विहार निवासी महिला ने पति को घर ले जाने से इनकार करते हुए कहा था कि पति का व्यवहार बेहद क्रूर रहा है। वह उसकी और उसके बच्चों की जिंदगी में तनाव पैदा करता है और काफी शक्की मिजाज का है।
वहीं पति ने मेंटल हेल्थ अधिनियम के आधार पर याचिका दायर कर अपने परिवार को निर्देश देने की मांग की थी कि उसे घर वापस ले जाया जाए, क्योंकि अब उसे इलाज की जरूरत नहीं है।