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आपत्तिजनक कमेंट ना करें राजठाकरे: HC

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हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे को हिदायत दी है कि वह उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी न करें।
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अदालत ने ठाकरे की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे राज्य व भाषा से परेशानी नहीं होनी चाहिए। सबको अपने राज्य व भाषा को बढ़ाना देने का हक है।

न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह, राज ठाकरे की याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। ठाकरे ने याचिका में निचली अदालत से जारी वारंट संबंधी निर्णय को चुनौती दी है।
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ठाकरे को अदालत ने दी कड़ी चेतावनी

अदालत ने सुनवाई के दौरान ठाकरे को अब ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियां न करने की चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी राज्य व भाषा मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

इससे पूर्व ठाकरे के वकील ने कहा कि जांच अधिकारी मामले में रिपोर्ट दायर करने में नाकाम रहा है। बावूजद इसके निचली अदालत ने मामले में समन जारी कर दिए थे।

अदालत को समन जारी करने के लिए ऐसे मामलों में केंद्र सरकार व राज्य सरकार से अनुमति लेने का प्रावधान है। गौरतलब है कि वर्ष 2008 में उत्तर भारतीयों के महाराष्ट्र में काम करने को लेकर राज ठाकरे ने आपत्तिजनक भाषण दिया था।
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इसके बाद उनके खिलाफ मुंबई, उत्तराखंड, बिहार और यूपी में अलग-अलग लोगों द्वारा याचिकाएं दायर कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। उक्त सभी याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।

निचली अदालत ने इस मामले में राज ठाकरे के पेश न होने पर उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। निचली अदालत के उक्त आदेश को राज ठाकरे ने हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी।

जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने गैर जमानत वारंट पर रोक लगा दी थी।
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