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कोर्ट का कन्हैया को स्थायी जमानत देने से इंकार, ट्रायल कोर्ट जाने का निर्देश

Thu, 18 Aug 2016 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कन्हैया - फोटो : Amar Ujala
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हाईकोर्ट ने देशद्रोह मामले में आरोपी जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को स्थायी जमानत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कन्हैया को स्थायी जमानत के लिए निचली अदालत में आवेदन दायर करने का निर्देश दिया है। 
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कन्हैया को विगत 2 मार्च को हाईकोर्ट ने छह माह की अंतरिम जमानत प्रदान की थी। न्यायमूर्ति पीएस तेजी ने कन्हैया की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जॉन के उस तर्क को खारिज कर दिया कि कन्हैया ने छह माह की अंतरिम जमानत के दौरान  तय शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं किया। 

इसके अलावा जब भी जांच अधिकारी ने उसे बुलाया कन्हैया ने जांच में सहयोग किया है। ऐसे में उसे मिली अंतरिम जमानत को स्थायी जमानत में तब्दील किया जाए। 

अदालत में कुछ मिनट चली सुनवाई के बाद आवेदन को खारिज कर दिया और उन्हें निर्देश दिया कि वह नियमित जमानत के लिए निचली अदालत में आवेदन दायर कर सकते हैं। 
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हाईकोर्ट से मिली थी छह माह की अंतरिम जमानत

कोर्ट
कन्हैया के अधिवक्ता ने बताया कि आज ही निचली अदालत में जमानत आवेदन दायर करेंगे क्योंकि कन्हैया की अंतरिम जमानत 1 सितंबर को समाप्त हो रही है। 

पुलिस का आरोप है कि कन्हैया व उसके साथियों ने जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशविरोधी नारेबाजी की थी इसके बाद पुलिस ने कन्हैया, उमर खालिद सहित कई छात्रों को गिरफ्तार किया था। 

हाईकोर्ट ने 2 मार्च को कन्हैया को सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि कन्हैया किसी भी प्रकार की देशविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त नहीं होगा। 

इसके बाद कन्हैया द्वारा दिए गए बयानों का आधार बनाकर अंतरिम जमानत रद करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान पुलिस ने अपने जवाब में यह नहीं बताया कि कन्हैया ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है या नहीं, उधर दिल्ली सरकार ने जमानत रद करने के आवेदन पर आपत्ति जताई थी।

आखिर अदालत ने हाल ही में दिए अपने फैसले में कन्हैया की अंतरिम जमानत रद करने से इंकार कर दिया था। अदालत का मानना था कि आपराधिक मामले में किसी भी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है बल्कि अभियोजन पक्ष या शिकायतकर्ता की इस प्रकार का आवेदन दायर कर सकता है।
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