सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग को गैरकानूनी ठहराने व केंद्र द्वारा दिल्ली सरकार के गैरकानूनी ठहराए गए आदेशों पर अमल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने संबंधी मामले में केंद्र सरकार व उपराज्यपाल (एलजी) को हाईकोर्ट से झटका लगा है।
अदालत ने आयोग की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वहीं, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी उपराज्यपाल आदेश को भी निष्प्रभावी कर दिया। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए किसी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि वे मामले में मात्र कानूनी पहलुओं पर ही विचार करेंगे। खंडपीठ ने सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में न्यायिक आयोग के गठन पर सवाल उठाने पर पूछा कि, आपने आयोग द्वारा एसीबी चीफ एमके मीणा के खिलाफ जारी वारंट को रद्द करवाने के लिए जब आवेदन किया था तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश की क्या जरूरत थी।
दिल्ली के उलझते मामलों की सुनवाई तय
खंडपीठ ने कहा कि, उनका मानना है कि यह कानूनी मुद्दा है और हम कानूनी पहलुओं पर ही विचार करेंगे। अदालत ने बृहस्पतिवार से विभिन्न मामलों में सुनवाई तय की है।
खंडपीठ के समक्ष आयोग के गठन को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं के अलावा, मीणा के खिलाफ वारंट, एसीबी के अधिकार क्षेत्र मामला, डिस्कॉम में दिल्ली सरकार द्वारा निदेशकों की नियुक्ति को चुनौती, राजधानी में कृषि भूमि सर्किल रेट को चुनौती इत्यादि याचिकाओं पर सुनवाई तय थी।
खंडपीठ ने कहा कि सभी मामले एक दूसरे से जुड़े है और सभी पर एक साथ सुनवाई करेंगे। इससे पूर्व दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाया।
आयोग समानांतर जांच कर सकता है
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने सीएनजी फिटनेस घोटाले में अधिकारियों की लापरवाही की जांच के लिए आयोग का गठन किया है। केंद्र सरकार ने इसे गैरकानूनी ठहराया दिया। अधिवक्ता धवन ने अदालत के पूछे गए सवाल पर कहा कि मामले में आरोपपत्र दायर होने के बावजूद आयोग समानांतर जांच कर सकता है।
अधिवक्ता धवन ने कहा कि केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल के जरिये दिल्ली सरकार में कार्यरत दानिक्स अधिकारियों को सरकार के फैसलों पर अमल करने पर कार्रवाई व रिकवरी का आदेश दिया है। यह आदेश गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बिना कारण सरकार में कार्यरत अधिकारियों को बदल रही है। केंद्र सरकार व उपराज्यपाल का रवैया संविधान व कानून व्यवस्था का उल्लंघन करने वाला है।
खंडपीठ ने डिस्कॉम में निदेशकों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के आधार पर नियुक्ति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। याची ने तर्क रखा था कि सरकार ने गैरकानूनी व मनमाने तरीके से निदेशकों की नियुक्ति की है। खंडपीठ ने इस मामले में भी यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 24 सितंबर तय कर दी।