दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट देने के बदले में रिश्वत लेने वाले हिंदूराव अस्पताल के क्लर्क कंवर सिंह को मिली तीन वर्ष कैद की सजा को उचित ठहराया है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में राहत प्रदान करने का अर्थ है, उसे बढ़ावा देना।
न्यायमूर्ति एस मुरालीधर ने फैसले में कहा कि पेश साक्ष्यों व तथ्यों से स्पष्ट है, आरोपी ने याची से उसके पुत्र की मेडिकल रिपोर्ट देने के लिए पांच सौ रुपये बतौर रिश्वत ली थी। अदालत ने कंवर सिंह के फर्जी मामले में फंसाने के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चश्मदीदों के बयानों से स्पष्ट है कि दोषी ने उनके समक्ष रुपये लिए थे।
इसके अलावा दोषी यह भी साबित नहीं कर पाया कि बरामद राशि उसकी थी। निचली अदालत के फैसले में कोई भी कानूनी गलती नहीं है जिसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, याची के पुत्र को दो जून 2001 को बुरी तरह से घायल हालत में हिंदूराव अस्पताल में भर्ती करवाया गया था और वह 6 जून तक भर्ती रहा।
डॉक्टरों ने एमएलसी में मामूली रूप से घायल दिखाया था। याची ने कोर्ट केस में जरूरत के आधार पर मेडिकल रिपोर्ट मांगी। अस्पताल में रिकार्ड क्लर्क के रूप में कार्यरत कंवर सिंह ने इसके लिए एक हजार रुपये रिश्वत मांगी थी।