कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से दिल्ली के निगम बोध घाट पर बेहद कम संख्या में शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। सामान्य हालातों में यहां प्रतिदिन 60-70 के बीच अंतिम संस्कार संपन्न होते हैं। कड़ी ठंड के समय में यह संख्या सौ तक भी पहुंच जाती है, लेकिन कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाने के बाद अब यह संख्या घटकर 30 के आसपास रह गई है।
कोरोना के मामले में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार सीएनजी दाह-उपकरण के माध्यम से किया जा रहा है। हालांकि, निगम बोध घाट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी जलाकर अंतिम क्रिया करने की पारंपरिक विधि के साथ-साथ बिजली और सीएनजी उपकरण के माध्यम से भी अंतिम संस्कार करने की सुविधा उपलब्ध है।
सीएनजी दाह-उपकरण से शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए एक हजार रुपये का शुल्क लिया जाता है। जबकि छह रुपये प्रति किलो के हिसाब से लकड़ी के माध्यम में 2400 रुपये का शुल्क निर्धारित है।
अंतिम क्रिया कराने वाले पंडितों की दक्षिणा इससे अलग होती है। गरीब परिवार के लोगों के पास पैसे न होने की स्थिति में निगम बोध घाट का ट्रस्ट उनका निःशुल्क शवदाह करता है।
जिस दाह संस्कार-उपकरण में कोरोना संक्रमित व्यक्ति का शव जलाया जाता है, शवदाह के बाद उसे भी केमिकल से पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है। अंतिम संस्कार में भाग लेने वाले लोगों को भी क्रिया के बाद संक्रमणमुक्त किया जाता है।
घाट पर काम कर रहे कर्मियों और पंडितों के लिए भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। सभी कर्मी फेसमास्क के साथ काम कर रहे हैं। हर घंटे में उन्हें हाथ धोना अनिवार्य कर दिया गया है।
दिल्ली में कोरोना संक्रमण से मृत हुए एक व्यक्ति के शवदाह को लेकर विवाद हो गया था। कथित तौर पर घाट ने असुरक्षित माहौल में शवदाह करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना से मृत व्यक्तियों के शवदाह पर एक गाइडलाइन तय की, जिसके बाद से शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शवदाह के समय पीपीई किट में डॉक्टरों की एक टीम घाट तक जाएगी। संक्रमण रोकने के लिए अंतिम क्रिया के समय किए जाने वाले कुछ कर्म में भी बदलाव किया गया है। अंतिम कर्म के बाद टीम, घाट के कर्मी और अन्य लोगों को संक्रमण से मुक्त किया जाना अनिवार्य है।
अनुमान है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोग अपने प्रियजनों की मौत के बाद इस समय अपने आसपास के शवदाह गृहों में ही अंतिम संस्कार करवा रहे हैं। इससे निगमबोध घाट तक आने वाले शवों की संख्या में काफी कमी आई है।