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कोरोना वायरस: फरीदाबाद में चरम पर पहुंचा संक्रमण, सीरो सर्वे से हुआ खुलासा

Sat, 05 Sep 2020 06:04 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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कोरोना एक बार फिर से औद्योगिक नगरी को अपनी चपेट में ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि सीरो सर्वे के जरिए की है। अगस्त में विभाग ने रैंडम सैंपलिंग सर्वे यानी बिना किसी निर्धारित माप दंड के जिले से औचक रूप से कुल 850 लोगों की जांच की। 
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इसमें 25.8 फीसदी लोग कोविड-19 से लड़ने की क्षमता रखने वाले प्रतिरक्षी पाए गए। यह दर प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कई रणनीतिक बदलाव की योजना तैयार की है। 

अन्य सर्वे के जरिए मौजूदा समय में संक्रमण दर जानने की भी योजना है। साथ ही विभाग ने एनसीआर निवासियों को सतर्क रहने की अपील की है। सीरो सर्वे में औद्योगिक नगरी प्रदेश से 22 जिलों के मुकाबले सबसे अधिक संक्रमण की जद में मिली है। 
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अन्य जिलों के मुकाबले फरीदाबाद के 500 ग्रामीणों में से सबसे अधिक 22.2 फीसदी में संक्रमण प्रतिरक्षी मिले, जबकि अन्य जिलों के ग्रामीण इलाकों में यह दर बेहद कम मिली। सर्वे में शामिल 22 जिलों से एक समान 850 लोगों की सैंपलिंग की गई। 

इसमें अन्य सभी जिलों की दस फीसदी ग्रामीण आबादी ही संक्रमण प्रतिरक्षा निहित मिली यानी वहां संक्रमण की पकड़ अभी ग्रामीण इलाके में कमजोर है। वहीं, फरीदाबाद के ग्रामीण इलाके से मिले सीरो सर्वे के परिणाम कोविड-19 की चपेट में आने का संकेत दे रहे हैं। सर्वे के अनुसार, सोनीपत में 10, यमुनानगर के 9.9, करनाल के 8, गुरुग्राम में 5.7 फीसदी ग्रामीणों में संक्रमण के बाद विकसित होने वाले प्रतिरक्षी पाए गए।

 
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अन्य जिलों की स्थिति बेहतर

गुरुग्राम और फरीदाबाद संक्रमण की तुलनात्मक स्टेज पर हैं, लेकिन एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए किए गए सीरो सर्वे में दोनों जिलों में अंतर दोगुने से अधिक हैं। फरीदाबाद के 25.8 फीसदी लोगों में संक्रमण प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) मिले तो गुरुग्राम के 10.8 फीसदी लोग इस जद में मिले। नूंह के 20.3 सोनीपत के 13.3, करनाल के 12.2, जींद के 11, कुरुक्षेत्र के 8.7, चरखी दादरी और यमुनानगर के 8.3 फीसदी लोगों में संक्रमण प्रतिरक्षी मिले।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में अंतर करना काफी चुनौतीपूर्ण हो रहा है। यहां शहरी क्षेत्र की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र भी अर्द्ध शहरी हैं। ऐसे में दोनों ही क्षेत्रों में संक्रमण का न सिर्फ बराबर खतरा है बल्कि समान रूप से सतर्कता की जरूरत भी है। संक्रमण को रोकने के लिए लोगों का सहयोग अनिवार्य है। 
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