कोरोना शवों के लिए यहां पांच बीघा जमीन आरक्षित की गई थी लेकिन दो महीने पहले ही वह भर चुकी है। इसके बाद दो बीघा जमीन को और साफ कराया गया लेकिन पिछले एक सप्ताह में हर दिन बढ़ते शवों की वजह से यह भी अब पूरी तरह से फुल हो चुकी है।
कोरोना वायरस की चौथी लहर में फिर से मौत का आंकड़ा बढ़ने लगा है। पिछले एक दिन में 100 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई है। हालात इस कदर हैं कि दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में साल भर के दौरान ही 80 फीसदी जमीन भर चुकी है।
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कोरोना शवों के लिए यहां पांच बीघा जमीन आरक्षित की गई थी लेकिन दो महीने पहले ही वह भर चुकी है। इसके बाद दो बीघा जमीन को और साफ कराया गया लेकिन पिछले एक सप्ताह में हर दिन बढ़ते शवों की वजह से यह भी अब पूरी तरह से फुल हो चुकी है।
आईटीओ स्थित जदीद कब्रिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, इस साल पहले 45 दिन में केवल पांच शवों को दफनाया गया था। कोरोना की लहर लगभग पूरी तरह से शांत थी तो यहां भी थोड़ा बहुत सुकून था लेकिन जैसे-जैसे दिल्ली में संक्रमण की चौथी रफ्तार बढ़ने लगी। स्थिति यहां तक आ गई कि पिछले 10 दिन में रोजाना 70 के करीब शवों को दफनाया जा रहा है।
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कब्रिस्तान में कर्मचारी मोहम्मद शमीम का कहना है कि अभी सिर्फ 150 शवों को दफनाने की जमीन ही बच पाई है। पीपीई किट और सुरक्षा बीमा को लेकर सरकार ने उन्हें अब तक कोई राहत नहीं दी है। वह अपनी जान को खतरे में डालकर कोविड शवों का अंतिम संस्कार करवा रहे हैं लेकिन अब कब्रिस्तान में जगह का अभाव होने लगा है।
गुरुवार की रात को मोहम्मद शमीम आठ बजे तक शवों को दफनाने की क्रिया करते रहे। देर रात जीटीबी अस्पताल से पप्पू नामक संक्रमित का शव था जिसे उन्हें दफनाना पड़ा था।
ठीक इसी तरह श्मशान घाट की स्थिति देखें तो निगमबोध घाट पर 107 शवों का अंतिम संस्कार किया गया जिनमें से 34 संक्रमित शव थे। इस साल का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 70 कर दी है। रात 10 बजे तक यहां अंतिम संस्कार किया जा रहा है।