अधिकारी के मुताबिक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने भी राजधानी में सीएनजी पंपों पर 50 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। बैटरी स्वैप करने की सुविधा वाले इलेक्ट्रिक वाहन काफी सस्ते होते हैं, लेकिन दोपहिया वाहनों के लिए थोड़ी मुश्किलें हैं। दिल्ली सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। ताकि यह देखा जा सके कि हम इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की ओर जाने के लिए उनके लिए नियामकीय दबाव कैसे बना सकते हैं।
अग्रणी कंपनियां अपना रही हैं ई वाहनदिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति, अगस्त 2020 में पेश की गई। इसका मकसद 2024 तक कुल वाहन बिक्री में 25 फीसदी तक ईवी हिस्सेदारी को बढ़ाना है। अभी तक केवल फ्लिपकार्ट (2030 तक) और फेडेक्स (2040 तक) ने अपने अंतिम मील डिलीवरी के बेड़े को दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का लक्ष्य रखा है। डीएचएल भी अपने बेड़े के लिए 60 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का लक्ष्य तय किया है।
नियंत्रित प्रदूषण के मानकों का पालन न करने पर हो सकती है जेल भीअक्टूबर में में वाहनों के पीयूसी प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर लगभग 500 टीमें तैनात की गईं। मोटर वाहन अधिनियम, 1993 की धारा 190 (2) के तहत, वैध पीयूसी नहीं रखने वाले वाहन मालिकों पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने तक की कैद या दोनों हो सकते हैं। इसके तहत वाहन मालिकों को अपने वाहनों का परीक्षण करवाना आवश्यक है ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के बाद ही उन्हें सड़कों पर चलने की इजाजत हो। पेट्रोल पंपों और वर्कशॉप में करीब 1,000 अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र हैं।