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दिल्ली में वायु प्रदूषण: कैब एग्रीगेटर्स-ई कॉमर्स कंपनियों के बेड़े को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने पर मंथन 

Mon, 27 Dec 2021 10:25 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

एक जनवरी पर 10 साल पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण होगा रद्दनेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत 1 जनवरी, 2022 को 10 साल पूरे करने वाले सभी डीजल वाहनों का पंजीकरण दिल्ली सरकार की ओर से रद्द कर दिया जाएगा। उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी की जाएगी ताकि दूसरे राज्यों में वाहनों को दोबारा पंजीकृत किया जा सके। इस महीने जारी एक आदेश के मुताबिक आवेदन की तारीख पर 15 साल पूरा करने वाले वाहनों को एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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दिल्ली सरकार जल्द ही ई-कॉमर्स कंपनियां, खाद्य वितरण सेवा और कैब एग्रीगेटर्स को इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के लिए निर्देश जारी कर सकती है। वायु प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए 2024 तक कुल वाहनों की बिक्री में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वायु प्रदूषण में कमी के लिहाज से बगैर नियंत्रित प्रदूषण का प्रमाण पत्र के वाहनों को ईंधन की आपूर्ति न करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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 दिल्ली में होने वाले वायु प्रदूषण में करीब 40 फीसदी वाहनों से होने वाला प्रदूषण है। सरकार वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जोमैटो, ओला, उबर, स्विगी सहित सभी कैब एग्रीगेटर को भी इलेक्ट्रिक वाहनों में स्विच करने के लिए कहने की तैयारी में है। दिल्ली में इस वर्ग में करीब 30 फीसदी वाहन पंजीकृत हैं। दिल्ली सरकार की ओर से बगैर नियंत्रित प्रदूषण प्रमाण पत्र वाले वाहनों को ईंधन की आपूर्ति न करने का निर्देश जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत इसी सप्ताह इस संबंध में निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है।

परिवहन विभाग के एक अधिकारी से जब सवाल किया गया कि क्या कैब एग्रीगेटर्स को इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के लिए कोई समय सीमा दी जाएगी तो उन्होंने कहा कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। हम जल्द ही मसौदा दिशा निर्देश प्रकाशित करेंगे। इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने सहित परिवहन विभाग ई वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग की सुविधा मुहैया कराने पर विचार किया जा रहा है।
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अधिकारी के मुताबिक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने भी राजधानी में सीएनजी पंपों पर 50 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। बैटरी स्वैप करने की सुविधा वाले इलेक्ट्रिक वाहन काफी सस्ते होते हैं, लेकिन दोपहिया वाहनों के लिए थोड़ी मुश्किलें हैं। दिल्ली सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। ताकि यह देखा जा सके कि हम इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की ओर जाने के लिए उनके लिए नियामकीय दबाव कैसे बना सकते हैं।

अग्रणी कंपनियां अपना रही हैं ई वाहनदिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति, अगस्त 2020 में पेश की गई। इसका मकसद 2024 तक कुल वाहन बिक्री में 25 फीसदी तक ईवी हिस्सेदारी को बढ़ाना है। अभी तक केवल फ्लिपकार्ट (2030 तक) और फेडेक्स (2040 तक) ने अपने अंतिम मील डिलीवरी के बेड़े को दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का लक्ष्य रखा है। डीएचएल भी अपने बेड़े के लिए 60 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का लक्ष्य तय किया है। 
 
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नियंत्रित प्रदूषण के मानकों का पालन न करने पर हो सकती है जेल भीअक्टूबर में में वाहनों के पीयूसी प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर लगभग 500 टीमें तैनात की गईं। मोटर वाहन अधिनियम, 1993 की धारा 190 (2) के तहत, वैध पीयूसी नहीं रखने वाले वाहन मालिकों पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने तक की कैद या दोनों हो सकते हैं। इसके तहत वाहन मालिकों को अपने वाहनों का परीक्षण करवाना आवश्यक है ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के बाद ही उन्हें सड़कों पर चलने की इजाजत हो। पेट्रोल पंपों और वर्कशॉप में करीब 1,000 अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र हैं। 

 
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