रामनवमी पूजा का जिस दिन पोस्टर कैंपस में लगा था, उसी दिन विरोध शुरू हो गया था। वामपंथी छात्र संगठनों के छात्रों ने इस पूजा पूरा न होने की धमकी दी थी। कावेरी हॉस्टल एक लड़कों का हॉस्टल है, यहां लड़कियों के अंदर आने पर रोक है। इसके बाद भी अन्य हॉस्टल की सबसे अधिक संख्या में लड़कियां ही पहुंची और पूजा रोकने की कोशिश की। इसी कारण पूजा साढ़े तीन की बजाय साढ़े चार से पांच बजे के बीच शुरू हो पाई। कावेरी हॉस्टल के छात्रों ने ही मिलकर पूजा और इफ्तार पार्टी पर सहमति दी थी। उस समय यह तय हुआ था कि नॉन-वेज को खाने में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे में एक ओर पूजा के समय सामने इफ्तार पार्टी में नॉन-वेज लाना गलत था।
कावेरी हॉस्टल के छात्रों का यह आपसी मामला था, जोकि बात से सुलझ जाता पर अचानक से पत्थराव हो गया। यह पत्थराव अन्य हॉस्टल की लड़कियों ने शुरू किया, जबकि उन्हें बुलाया नहीं गया था। एबीवीपी छात्रों को सिर, हाथ, पैर में चोट आयी हैं। जबकि दिव्यांग छात्रों के कपड़े तक फाड़ दिये गए। वामपंथी छात्र संगठन नॉन-वेज को मुद्दा बनाकर पूजा रोकने की धमकी को अब भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
-आदर्श झा, छात्र व मीडिया संयोजक, एबीवीपी जेएनयू इकाई।
जेएनयू एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहां पर छात्र कहां खाएगा, इसका फैसला वो खुद करेंगे। एबीवीपी कैसे किसी छात्र को नॉन-वेज खाने से रोक सकती है। कावेरी हॉस्टल मैस में रविवार के चलते नॉन-वेज बन रहा था। छात्रों को चिकनइ और पनीर का विकल्प दिया जाता है। ऐसे में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने मैस में जाकर पहले नॉन-वेज बनाने से रोका। पूजा में नॉन-वेज लाने वाली बात बिल्कुल गलत है।
एबीवीपी जानबुझकर छात्रों को उनके बनाए नियम से खाना खाने के लिए बाध्य कर रही है। अब जो छात्र व्रत करते हैं, वे क्या खाएंगे, यह उनका अपना फैसला है, लेकिन उनके लिए अन्य छात्रों को खाने के लिए रोकना गलत बात है। जब इस बात पर छात्रों ने विरोध किया तो मारपीट शुरू कर दी। इफ्तार पार्टी में लड़क और लड़कियां सभी शामिल हो सकते हैं। इसलिए वहां लड़कियों के आने से कोई दिक्कत नहीं थी। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर खाने में बंदिश क्यों लगाई जा रही हैं।
-एन साई बालाजी, पूर्व अध्यक्ष जेएनयू छात्रसंघ, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आइसा।