दिल्ली में मच्छरजनित बीमारियों की स्थिति पर विवाद गहराता जा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि इस साल मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले रिकॉर्ड स्तर पर हैं लेकिन डेंगू के मामलों में एमसीडी ने असामान्य गिरावट दिखाई है। इसी विरोधाभास ने अब एमसीडी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के सवालों के बाद एमसीडी ने साप्ताहिक रिपोर्ट जारी करना ही बंद कर दिया है।
एमसीडी की ओर से जारी अंतिम साप्ताहिक रिपोर्ट (4 अक्तूबर) के अनुसार, दिल्ली में अब तक मलेरिया के 431 और चिकनगुनिया के 76 मामले दर्ज किए गए जो पांच वर्षों में सर्वाधिक हैं। डेंगू के केवल 840 मामले दर्ज दिखाए गए हैं जबकि 2024 में इसी अवधि तक यह संख्या 1,630 और 2023 में 2,701 थी। आंकड़ों के अनुसार, इस साल मलेरिया के मामले 2024 से भी अधिक हैं लेकिन डेंगू में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रुझान एडीज मच्छर के व्यवहार के विपरीत है क्योंकि यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया दोनों फैलाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो उन्हीं मच्छरों से फैलने वाला डेंगू अचानक आधा कैसे हो गया। क्या यह डेटा संग्रह में तकनीकी त्रुटि है या किसी स्तर पर मामले दर्ज ही नहीं किए जा रहे।
जवाब नहीं दे रही एमसीडी
सात अक्तूबर के बाद से एमसीडी की कोई नई साप्ताहिक रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। परंपरा के मुताबिक हर सोमवार को एमसीडी मच्छर जनित रोगों की स्थिति रिपोर्ट जारी करती थी जो मीडिया और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभागों के लिए प्रमुख स्रोत मानी जाती थी। अब रिपोर्ट जारी न होने से डेटा की पारदर्शिता पर और प्रश्न खड़े हो गए हैं। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि जैसे ही मीडिया और विपक्ष ने आंकड़ों में गड़बड़ी पर सवाल उठाने शुरू किए एमसीडी ने रिपोर्ट प्रकाशित करना रोक दिया।
आप ने आंकड़े छुपाने का आरोप लगाया
आप के वरिष्ठ पार्षद व नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि जब अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी और मीडिया ने आंकड़ों पर सवाल उठाए तब एमसीडी ने साप्ताहिक रिपोर्ट जारी करना बंद कर दिया। पार्टी का कहना है कि यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है। मलेरिया-चिकनगुनिया रिकॉर्ड स्तर पर है लेकिन डेंगू गायब क्यों।
रिपोर्ट जारी कराई जाएगी : सत्या शर्मा
स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि अब मच्छरजनित बीमारियों के आंकड़े नहीं छुपाने देगी। उन्हें रिपोर्ट जारी नहीं करने के बारे में बृहस्पतिवार को ही मालूम हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को नियमित तौर पर रिपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।