सम विषम फेज दो राजधानी में बड़े स्तर पर सफल रहा है लेकिन इस दौरान स्कूल खुले होने, अलग-अलग सड़कों पर चल रहे निर्माण कार्यों, एनसीआर से आने वाले वाहनों की संख्या उम्मीद के अनुसार कमी न होने और शादियों के सीजन के कारण कुछ जगहों पर जाम की समस्या रही।
यह कहना है सरकार की ओर से सम विषम के दौरान जाम के कारणों का पता लगाने के लिए गठित की गई छह सदस्यीय कमेटी का। कमेटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट पेश की है। दरअसल सरकार को 15-30 अप्रैल के बीच लागू सम विषम फेज दो के दौरान ट्रैफिक जाम (कंजेशन) की ज्यादा शिकायतें मिली।
इसी को लेकर 23 अप्रैल को परिवहन मंत्री गोपाल राय ने विशेष परिवहन आयुक्त केके दहिया के नेतृत्व में छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसे पहले फेज की तुलना में कंजेशन बढ़ने के कारणों को लेकर रिपोर्ट तैयार करना था। बुधवार को कमेटी ने जो रिपोर्ट जारी की है उसके मुताबिक दिल्ली में बड़े स्तर पर सम-विषम फेज दो सफल रहा है। पहले फेज की तुलना में इस बार दिल्लीवालों ने ज्यादा लोगों ने इसे अपनाया।
नहीं घटी एनसीआर से आने वाली वाहनों की संख्या
जाम में फंसे वाहन
मगर जाम के लिए अलग-अलग कई कारण बताए। जिसमें स्कूल खुले होने को बड़ा कारण बताया। जाम उन सड़कों पर रहा जहां स्कूल ज्यादा थे। कमेटी ने छह स्कूलों डीपीएस आरकेपुरम, डीपीएस ईस्ट ऑफ कैलाश, डीपीएस वसंत विहार, एनके बगरोडिया स्कूल रोहिणी, केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल जीके दो और मॉडर्न स्कूल बाराखंभा का एक सैंपल सर्वे किया।
इस दौरान 13 हजार से ज्यादा बच्चों से बात की गई तो कमेटी ने पाया कि इस बार बड़ी संख्या में लोगों ने स्कूल आने के लिए कार का इस्तेमाल किया। पहले फेज में स्कूल बंद होने से ऐसा नहीं था। इस बार पहले फेज की तुलना में 3.88 लाख कार, 1.34 बाइक और 8000 अतिरिक्त बसें अतिरिक्त सड़कों पर उतरी।
इसके अलावा भैरो मार्ग, राव तुलाराम मार्ग, बीआरटी कॉरिडोर पर निर्माण कार्य और उसके चलते बने बॉटलनेक सड़कें भी कंजेशन का कारण बने। इससे उस दायरे में आने वाली 8-10 किलोमीटर सड़कें जाम से प्रभावित रही।
रिपोर्ट में कमेटी ने बताया कि 30 हजार सीएनजी वाहनों के सड़क पर बढ़ने के साथ ही एनसीआर से आने वाले वाहन नहीं घटे। कमेटी ने पाया कि इस दौरान वाहनों की संख्या में कमी नहीं आई।एनसीआर के लोगों ने इस दौरान वाहन नहीं छोड़ा। उन्होंने कारपूलिंग और दूसरी कार को ही साधन चुना। जिससे कंजेशन की समस्या रही।