जांच में सहयोग करने वाले की गिरफ्तारी से बचना चाहिए
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के साथ बड़ी मात्रा में अपमान और बदनामी जुड़ी होती है। ऐसे में उन परिस्थितियों में हिरासत में पूछताछ से बचना चाहिए, जहां आरोपी जांच में शामिल होने के अलावा जांच एजेंसी के साथ सहयोग कर रहा हो और उसके भागने की संभावना न हो। अदालत ने एक मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि जमानत की कार्यवाही का उपयोग मौद्रिक विवादों में वसूली के साधन के रूप में किया जाना चाहिए, क्योंकि धन की वसूली सिविल कार्यवाही के दायरे में आती है।
एफएसएल को शीघ्र रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
अदालत ने सोमवार को दिल्ली की फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को स्विस महिला हत्या मामले में लंबित एफएसएल परिणामों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। जनवरी में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह मामला आरोप तय करने के चरण में है और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है। यह मामला अक्टूबर 2023 में तिलक नगर इलाके में एक स्विस महिला की कथित हत्या से संबंधित है। दिल्ली पुलिस पहले ही आरोप पत्र दायर कर चुकी है। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय शंकर ने एफएसएल के निदेशक को परिणामों में तेजी लाने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई 15 मई तय की है। 30 जनवरी को कोर्ट ने एफएसएल के निदेशक को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने उन्हें सुनवाई की अगली तारीख से पहले उचित रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। अदालत ने तिलक नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को भी नोटिस जारी किया था और सुनवाई की अगली तारीख पर या उससे पहले एफएसएल परिणाम के संबंध में उचित रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
पूर्वोत्तर दंगे : अदालत ने दो आरोपियों को संदेह का लाभ देकर किया रिहा
अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में दो आरोपियों को दंगा, दो पुलिस अधिकारियों को गंभीर चोट पहुंचाने और अन्य आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष उनका अपराध साबित करने में असफल रहा है और दोनों आरोपी व्यक्ति संदेह के लाभ के हकदार हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने दोनों व्यक्तियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि इन दोनों आरोपियों की पहचान से संबंधित साक्ष्य पूर्ण सबूत नहीं हैं और यह मानने के लिए कि दोनों आरोपी हैं, दो प्रमुख सार्वजनिक गवाहों की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा। इन दोनों पीड़ितों या घायल (पुलिस) अधिकारियों द्वारा आरोपियों की पहचान की पूरी प्रक्रिया संदेह से भरी है। अदालत आबिद अली और शेरू उर्फ राजा के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन पर 23 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक दंगों के दौरान मुख्य विजय पार्क रोड पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और पथराव करने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप था।