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कोरोना का डरः तुगलकाबाद डिपो पर दो महीने से नहीं आए कंटेनर, फैक्टरियां बंद

Fri, 13 Mar 2020 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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तुगलकाबाद डिपो - फोटो : अमर उजाला
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वैश्विक महामारी घोषित होने के बाद अब कोरोना वायरस ने दिल्ली के व्यापार को रोक दिया है। तुगलकाबाद डिपो पर पिछले दो महीने से एक भी नया कंटेनर नहीं उतरा है। जनवरी तक यहां पुराने कंटेनर को पास कराने का काम चलता रहा, लेकिन 26 जनवरी के बाद से अब तक नया कंटेनर नहीं आने के चलते कस्टम व्यापार पूरी तरह से रुक चुका है।

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वहीं कस्टम क्लीयरिंग हाउस एजेंट खाली बैठे हैं। इनमें से कई ने अपने यहां काम करने वालों को छुट्टी दे दी है। वहीं नरेला और बवाना में कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। ये सभी फैक्ट्रियां कपड़े और जूते के निर्माण से जुड़ी हैं। यहां जनवरी से काम रुका हुआ है।

फैक्ट्री संचालकों ने अपने यहां काम करने वाले मजदूरों को निकाल दिया है और फैक्ट्रियों पर ताले लगा दिए हैं। इनका कहना है कि जब बाजार में सब कुछ ठीक होगा, तब आगे के बारे में सोचेंगे।
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तुगलकाबाद डिपो पर एजेंट विवेक वर्मा बताते हैं कि किसी भी कंटेनर को यहां तक आने में करीब 20 से 25 दिन का वक्त लगता है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह से ही चीन से कंटेनरों का आना बंद है, जबकि जनवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में बाकी देशों से भी कंटेनरों का आना बंद हो चुका है। डिपो पर जो भी कंटेनर थे वे सब जा चुुके हैं। ऐसे में फिलहाल इनके पास घर बैठने का ही एकमात्र विकल्प बचा है। इन्होंने अपने यहां काम करने वालों को छुट्टी दे दी है।

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बाजार पर लंबा असर

एक अन्य एजेंट श्याम अग्रवाल बताते हैं कि व्यापार काफी प्रभावित हो रहा है। 2020 की शुरुआत से ही व्यापार सबसे निचले पायदान पर है। इस स्थिति में लंबे समय तक बाजार में टिक पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर इस महीने के आखिर तक कोरोना वायरस का असर खत्म भी हो जाएगा, तो भी बाजार पर पड़े असर को दूर होने में कम से कम दो से तीन महीने और लगेंगे। फिलहाल की स्थिति देखकर ये स्पष्ट है कि जुलाई-अगस्त से पहले बाजार का फिर से पटरी पर लौटना मुमकिन नहीं है, इसीलिए ये बंद की ओर बढ़ रहा है।

बंद के अलावा विकल्प नहीं
स्वरूप नगर निवासी रवि कुकरेजा ने होली से एक दिन पहले अपनी फैक्ट्री में ताला लगा दिया था। उन्होंने सभी मजदूरों को व्यापार की स्थिति के बारे में बताते हुए फिलहाल उन्हें फैक्ट्री नहीं चलने की जानकारी देते हुए निकाल दिया। रवि बताते हैं कि उनके पास अन्य कोई विकल्प बचा ही नहीं है। वे कपड़ा निर्माण का कार्य करते हैं। काफी समय से उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। कच्चा माल आना बंद है और स्थिति ये है कि वेतन भी नहीं निकाल पा रहे। ऐसे में उन्होंने बवाना स्थित अपनी फैक्ट्री को फिलहाल बंद कर दिया है।

10 साल में जितना कमाया, सब गंवाया
फैक्ट्री संचालक बृजमोहन दास गुप्ता बताते हैं कि बीते 10 वर्ष में उन्होंने जितना भी कारोबार में कमाया, सब बीते कुछ महीनों में गंवा दिया। नरेला में जूता फैक्ट्री पिछले महीने ही बंद हो चुकी है। बवाना में उनकी एक और फैक्ट्री है जिसे उनका बड़ा बेटा चलाता है, पिछले सप्ताह इसे भी बंद कर दिया है। वे कहते हैं कि सुई तक के लिए चीन पर हम आश्रित हैं। ऐसी स्थिति में व्यापार कैसे चल सकता है।
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