परिवहन विभाग में सरकार द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने से अब उपभोक्ताओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट से बैंक का नाम हटवाने के लिए जीरो पैसे की रसीद कटवानी पड़ती है जिसके लिए 300 रुपये तक उपभोक्ताओं को चुकाने पड़ रहे हैं। जिसके बाद ही उपभोक्ता की आरसी से एचपी हट पाती है। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनसुविधा केंद्र पर सभी कार्यों को जोड़ दिया गया है और वहीं पर सारे काम कराए जा सकते हैं।
दरअसल, जब भी कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेकर वाहन खरीदता है तो वाहन स्वामी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर बैंक का नाम दर्ज हो जाता है। वाहन स्वामी की ओर से जब बैंक का ऋण जमा करा दिया जाता है तो संबंधित शाखा से एनओसी लेनी होती है। इसके बाद परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवा का प्रयोग करते हुए एक आवेदन संख्या ली जाती है और उसी के साथ जीरो पैसे की रसीद भी ऑनलाइन ही कटवानी पड़ती है।
ऑनलाइन आवेदन संख्या तो आसानी से मिल जाती है, लेकिन जीरो पैसे की रसीद कटाने में परेशानी आती है। इसके अलावा लोगों को रसीद कटवाने के बारे में जानकारी भी नहीं होती है। जिसके चलते वह परिवहन विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं तो अधिकारियों द्वारा रसीद कटवाने की बात बताई जाती है। उस समय उपभोक्ताओं के पास शून्य पैसे की रसीद को कटवाने के लिए केवल साइबर कैफे ही एक माध्यम बचता है। उपभोक्ता जब जीरो पैसे की रसीद कटवाने के लिए जाते हैं तो साइबर कैफे मालिक 300 रुपये तक ले लेते हैं। परिवहन विभाग की केवल छोटी सी प्रक्रिया के कारण लोगों को 300-300 रुपये तक देने पड़ रहे हैं।