लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को प्रदेश के मुस्लिम वोटरों का माकूल समर्थन नहीं मिलने से अब इस वर्ग को साधने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
हुड्डा सरकार पूरे पांच साल बाद हरियाणा वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारियों में है। इसके लिए गजट नोटिफिकेशन कर आठ सदस्यों का मनोनयन कर दिया गया है। नए चेयरमैन का चुनाव तीन जून को होगा।
उल्लेखनीय है कि ओमप्रकाश चौटाला सरकार में हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन तत्कालीन नूंह विधायक हामिद हुसैन हुआ करते थे। उनके निधन के बाद से बोर्ड का यह अहम पद रिक्त है।
इसके चलते पूरे पांच साल महकमे का जिम्मा ब्यूरोक्रेट्स के पास रहा। अब तक वक्फ बोर्ड के प्रशासक इसका काम काज देखते रहे। हालांकि, हामिद हुसैन के निधन के बाद से बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर निरंतर आवाजें उठती रहीं हैं।
गौरतलब है कि उर्दू अकादमी, हज कमेटी और वक्फ बोर्ड तीन ऐसे संस्थान हैं जिसके माध्यम से पिछली सरकारें मुस्लिम वर्ग के रसूखदारों को खुश करती रही हैं। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में इसको लेकर खास दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
ये हैं मनोनीत सदस्य
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पद के चुनाव से पहले सरकार ने आठ सदस्य मनोनीत किए हैं। इनमें आईपीएस अकील अहमद और डिप्टी स्पीकर अकमर खान के अलावा फिरोजपुर झिरका की कांग्रेस लीडर फजरी बेगम, नूंह के मौलवी खालिद, उटावड़ के मौलवी बेलाल, हथीन के विधायक जलेब खान के पुत्र चौधरी ईराइल, नरायाणगढ़ के गुलजार खान और शिया कम्यूनिटी से आलिया जैदी हैं। इसका 20 मई को गजट नोटिफिकेशन हो चुका है।
...और विवाद भी
अधिकांश मेवात क्षेत्र से वक्फ बोर्ड का सदस्य मनोनीत किए जाने पर विवाद शुरू हो गया है। इसमें फरीदाबाद, गुड़गांव और उर्दू के नामचीन शायर हाली के शहर पानीपत को भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। शिया कम्यूनिटी से ऐसे व्यक्ति को सदस्य बनाया गया है, जिनके लोग पहले भी सरकार के करीबी होने का लाभ उठाते रहे हैं। उधर, सदस्यों के मनोनयन पर हरियाणा अंजुमन वेल्फेयर ट्रस्ट के चेयरमैन व इनेलो नेता असलम खान ने कहा कि प्रदेश में चौटाला सरकार आने पर हरियाणा हज कमेटी, हरियाणा उर्दू अकादमी और वक्फ बोर्ड को लेकर की जा रही मनमानियां बंद की जाएंगी।