विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस में घमासान जारी है। नेताओं के चेहरे के पीछे छिपा असली चेहरा नजर आने लगा है। कभी मुख्यमंत्री से बड़े भाई और छोटे भाई का रिश्ता रखने वालों की आस्था डिगने लगी है।
प्रदेश में उठे सियासी तूफान के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं फरीदाबाद के पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना ने हुड्डा विरोधी राग छेड़ दिया है।
उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि यदि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा तो लोकसभा जैसी स्थिति होगी। इसलिए उन्हें किसी भी सूरत में हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने लोकसभा की तरह ही वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा में हरवाने का इंतजाम कर लिया है।
'सब दरकिनार, यहां चल रही हुड्डा कांग्रेस'
भड़ाना का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सारी नौकरियां रोहतक में बांटी हैं इसलिए वह लोकसभा में सिर्फ अपनी सीट बचा पाए। जबकि उन्हें पूरे प्रदेश के लिए काम करना चाहिए था। भड़ाना ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को यहां पर ‘हुड्डा कांग्रेस’ बना दिया है।
मुख्यमंत्री ने यहां कांग्रेस को खत्म करने का काम किया है। हुडा विरोधी गुट के भड़ाना ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में बैठे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को ताजा हालात, विकास कार्यों व नौकरियों में भेदभाव की जानकारी दी है।
कहा है कि यहां एक व्यक्ति नहीं बल्कि सामूहिक नेतृत्व से चुनाव लड़ा जाना चाहिए। भड़ाना का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पार्टी छोड़ने की बजाए अंदर रहकर लड़ाई लड़नी चाहिए।
बड़खल के लिए एसी चौधरी ने शुरू की सौदेबाजी
प्रदेश कांग्रेस की मुश्किल बढ़ाने में एक और नेता पूर्व मंत्री एसी चौधरी भी जुट गए हैं। तीन बार मंत्री रहे चौधरी ने मनचाही सीट पर टिकट के लिए सौदेबाजी शुरू कर दी है।
चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें एक बार एनआईटी विधानसभा से चुनाव लड़ाकर धोखा दिया गया है, लेकिन वे बार-बार धोखा नहीं खा सकते। अगर उन्हें बड़खल विधानसभा से टिकट नहीं दी गई तो कांग्रेस छोड़ देंगे। उनसे कई पार्टियां संपर्क में हैं।
चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपना यह फैसला प्रदेश कांग्रेस कमेटी को बता दिया है, निर्णय नेतृत्व को लेना है। बड़खल सीट से इस समय प्रदेश के राजस्व मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह विधायक हैं। चौधरी के लिए महेंद्र प्रताप सिंह का उनका किला तोड़ना इतना आसान नहीं है।