कांग्रेस के लिए इस समय राजनीतिक हालात कुछ कठिन हैं। केंद्र में वह अपना पुराना गौरव पाने के लिए संघर्ष कर रही है, तो मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बचाने की चुनौती से जूझ रही है। गुजरात में उसे कुछ अपने ही विधायकों-नेताओं की बगावत का डर सता रहा है, तो यूपी, बिहार और दिल्ली जैसे अहम राज्यों में सिफर हो चुकी पार्टी को दुबारा खड़ी करने की कठिन चुनौती है।
ऐसे मुश्किल हालात में पार्टी ने दिल्ली में नेतृत्व के लिए चौधरी अनिल कुमार पर भरोसा जताया है, जिन्होंने बुधवार को नए दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कामकाज संभाला। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद पार्टी ने युवा गुर्जर चेहरे अनिल कुमार को इस संघर्षपूर्ण मोर्चे पर लगाया है।
चौधरी अनिल कुमार कांग्रेस के उन दर्जनों नेताओं में से एक हैं जिन्हें पार्टी की दिग्गज नेता शीला दीक्षित ने भविष्य की राजनीतिक पौध के रूप में सींचा था। वे दिल्ली की राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मानी जाने वाली पिछड़ी जाति गुर्जर समाज से आते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि का होना उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।
माना जा रहा है कि चौधरी अनिल कुमार को अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। इससे पार्टी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ उन सभी सीटों पर मजबूत होगी, जहां पर गुर्जर और जाट समुदाय की आबादी बड़ी संख्या में रहती है। इस चाल से कांग्रेस प्रतिद्वंदी दलों भाजपा और आम आदमी पार्टी में गुर्जर समाज के प्रभावशाली नेताओं की कमी का लाभ उठा सकती है।
कांग्रेस नेतृत्व ने सिर्फ गुर्जर समुदाय को ही साधने की कोशिश नहीं की है, बल्कि उसने पांच नए उपाध्यक्ष भी नियुक्त किये हैं। ये सभी अपने-अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें दलित, मुस्लिम और महिला सबका ध्यान रखा गया है। इन सभी नेताओं की पृष्ठभूमि किसी मजबूत राजनीतिक परिवार से होने की बजाय महत्वाकांक्षी युवा कांग्रेसियों की है।
नई टीम देखकर इस बात का एहसास होता है कि पार्टी ने पुराने नेताओं की जकड़न से पार्टी को भविष्य की तरफ ले जाने वाली राजनीति की तरफ रुख कर लिया है। कुछ कर दिखाने और खुद को साबित करने के जोश से लबरेज ये युवा टीम कांग्रेस को दिल्ली में फिर से मजबूत करने में कोई कमी नहीं रख छोड़ेगी, ऐसा माना जा रहा है।
अब तक रहा ये करियर
चौधरी अनिल कुमार 2008 में पड़पड़गंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं। वे दिल्ली कांग्रेस की युवा टीम के अध्यक्ष (2008-12) रह चुके हैं। वे कांग्रेस की केंद्रीय टीम में सचिव, ओडिशा के को-इंचार्ज, एनएसयूआई अध्यक्ष और मीडिया कोऑर्डिनेटर की भूमिका भी संभाल चुके हैं।
वे मयूर विहार से दो बार काउंसलर भी रह चुके हैं। पार्टी ने कई बार उन पर अन्य अनेक जिमेदारियां भी सौंपी हैं।