दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का डिप्टी मेयर पद भाजपा से छिनने के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं। मेयर चुनाव में एक वोट से हार के बावजूद उसने अब चारों जोन की वार्ड समिति पर कब्जा करने की कवायद शुरू कर दी है।
कांग्रेस ने चारों जोन में जीत के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। वार्ड समितियों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है।
निगम में कांग्रेस के 35 पार्षद है। उसे डिप्टी मेयर चुनाव में चार सांसदों को छोड़कर 55 पार्षदों के वोट मिले, जबकि भाजपा समर्थित बसपा के उम्मीदवार को 46 पार्षदों ने वोट दिए।
गैर भाजपाइयों का कांग्रेस को समर्थन
फिलहाल कांग्रेस के पास भाजपा से अधिक पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस गैर भाजपा पार्षदों के समर्थन व भाजपा के पार्षदों में पैदा हुए असंतोष को चारों जोन की वार्ड समितियों के चुनाव में भुनाने में जुट गई है।
इसके अलावा कांग्रेस दस मनोनीत पार्षदों को भी वार्ड समिति के चुनाव में मतदान करने का अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। माना जा रहा है कि अगर पार्टी इसमें कामयाब हो गई तो तीन जोन में उसकी जीत सुनिश्चित है।
कांग्रेस ने दक्षिण, नजफगढ़ व पश्चिम जोन में भी जीत दर्ज करने की तैयारी की है। नजफगढ़ जोन में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है। दक्षिण दिल्ली में भी भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है।
कांग्रेस तैयार कर रही है नये सूरमा
कांग्रेस ने विपक्ष के नेता फरहाद सूरी को मध्य व दक्षिण जोन में जीत के लिए आवश्यक वोटों का इंतजाम करने की जिम्मेदारी दी है। मदद के लिए वीरेंद्र कसाना व धर्मवीर सिंह को लगाया था, जबकि नजफगढ़ और पश्चिम जोन में जीत के लिए डिप्टी मेयर प्रवीण राणा को कमान सौंपी है।
फरहाद सूरी के अनुसार सोमवार को चारों जोन में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल कराए जाएंगे। इन पदों के लिए भाजपा के पार्षदों के नाम सामने आने के बाद वह अपने पार्षदों के नामों की घोषणा करेगी। कांग्रेस को उम्मीद है कि वार्ड समिति के चुनाव में उसे अधिक पार्षदों का समर्थन मिलेगा।
वहीं कांग्रेस उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नरेला और सिटी जोन के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इन समितियों में भी किसी दल के पास बहुमत नहीं है।