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52 नेताओं को बुलाया, मोदी को छोड़ा

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पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती के मौके पर कांग्रेस ने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। पार्टी ने दुनिया के 52 नेताओं को इसके लिए न्योता भेजा है, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया है। इस पर विवाद खड़ा हो सकता है।
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कांग्रेस को कहीं न कहीं इस बात का खुन्नस है कि प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की जयंती को तो धूमधाम से मनाया, मगर नेहरू की जयंती के मौके पर वह देश में मौजूद नहीं हैं।

कांग्रेस ने भी कहा है कि प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी, सरदार पटेल की जयंती पर जिस तरह से अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई थी, उन्हें पहले प्रधानमंत्री की जयंती पर भी ऐसा करना चाहिए था।
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वैसे केंद्र सरकार नेहरू के जन्मदिन पर कार्यक्रमों की घोषणा पहले ही कर चुकी है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि दो दिनों के सम्मेलन की शुरुआत 17 नवंबर को विज्ञान भवन में होगी।

हाल ही में जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने भी अपने एक कार्यक्रम का पीएम मोदी को न्योता नहीं दिया था। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान के वरीज-ए-आजम नवाज शरीफ को बुलावा भेजा था। इस पर काफी विवाद हुआ था।

सोनिया-राहुल एक साथ करेंगे संबोधित

पंडित जवाहर लाल नेहरू की 125वीं जयंती 14 नवंबर को है लेकिन दिल्ली में कांग्रेस का बड़ा समारोह 13 नवंबर को ही होगा। तालकटोरा में आयोजित होने वाले इस 125वीं जयंती समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी कार्यकर्ताओं में जान फूंकेंगे।

शुरुआत में कार्यक्रम 14 नवंबर को होना था लेकिन सुबह समाधि पर कार्यक्रम के अलावा दिल्ली सरकार के छत्रसाल स्टेडियम में कार्यक्रम को देखते हुए तारीख बदली गई है। एक कारण बसें नहीं मिलना भी बताया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा है कि तालकटोरा के समारोह में पूरी दिल्ली के कार्यकर्ता व नेता एकत्रित होंगे। वहीं से विस चुनाव का बिगुल भी बजेगा। समारोह सुबह 11 बजे होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि कांग्रेस की सीधी टक्कर भाजपा से होगी। भाजपा और आम आदमी पार्टी के कारण दिल्ली का विकास रुका है। अनधिकृत कॉलोनी, गांव के लिए जो फैसले किए थे उसमें कुछ आगे नहीं बढ़ा है।

सूत्र बताते हैं कि 125वीं जयंती के लिए बनाई गई समिति की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अध्यक्ष हैं। जिसका कार्यक्रम 18-19 नवंबर को होना है। ऐसे में शीला दीक्षित भी कांग्रेस के इस कार्यक्रम में शामिल हो सकती हैं।

राज्यपाल से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के बड़े कार्यक्रम में शीला दीक्षित ने शिरकत नहीं की है। वहीं यह बात भी सामने आ रही है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रिय गुलाब का फूल समारोह में आने वाले हर कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेताओं को दिया जाएगा। ऐसी तैयारी चल रही है। इस बहाने नेहरू को याद करने के अलावा कांग्रेस की वोटर तक पहुंचने की शैली भी बदलेगी।

दो पार्षदों और एक भाजपा नेता ने थामा ‘हाथ’

चुनावी मौसम में नेताओं का दूसरी पार्टी में मोह दिखना शुरू हो गया है। निर्दलीय, बीएसपी व सपा के टिकट पर जीते पार्षद, विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी समेत एक भाजपा नेता ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह का कहना है कि कई और नेता हाथ थामने को तैयार हैं, उनकी कांग्रेस के प्रति विचाराधारा को परखकर ही शामिल कराया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह, मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा, पूर्व मंत्री हारून यूसुफ व सांसद महाबल मिश्रा की मौजूदगी में पूर्वांचल नेता व निगम पार्षद सतेन्द्र सिंह राणा, एमसीडी सेंट्रल जोन के पूर्व चेयरमैन जीवन लाल, देवली विस से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके किशोर कुमार राजौरा और भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष डॉ. वीरपाल कांग्रेस में शामिल हुए। जीवन लाल और किशोर कुमार राजौर दलित हैं तो डॉ. वीरपाल कश्यप समाज से हैं।

जल्दी घोषित करेगी प्रत्याशीः कांग्रेस पार्टी देरी से प्रत्याशी घोषित करने की परंपरा आगामी विधानसभा में तोड़ेगी। लवली ने कहा है कि प्रत्याशी चयन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एक सवाल के जवाब में कहा है कि देरी से टिकट दिए जाने के नुकसान से बचा जाएगा। इस बार कोशिश होगी कि जल्द प्रत्याशी घोषित करके उन्हें वोटर के बीच अधिक से अधिक समय रहने का मौका दिया जाए। ऐसा किए जाने से विरोधी पार्टी के जल्दी घोषित प्रत्याशियों की तरह फायदा मिलेगा।
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शीला की वापसी के लिए फिर कवायद

कांग्रेस के आठ में से चार पूर्व विधायकों ने मंगलवार शाम को उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। चौधरी मतीन अहमद की अगुवाई में मिले हसन अहमद, प्रहलाद सिंह साहनी और आसिफ मोहम्मद खान ने एकसुर में प्रदेश संगठन में कुछ लोगों की चौधराहट खत्म करने की मांग रखी है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथों कराए गए विकास कार्र्यों पर चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें भी सक्रिय किया जाए और गिने-चुने चेहरों की बजाय सामूहिक नेतृत्व में चुनाव कराए जाएं।

चौधरी मतीन अहमद ने कहा है कि प्रकोष्ठ, जिला, ब्लॉक स्तर पर करीब छह साल से कोई बदलाव नहीं हुए, सबकुछ भंग है, जिसका चुनाव में नुकसान हो सकता है। इन नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने शीला दीक्षित को सक्रिय करने की आवश्यकता स्वीकार की है। प्रदेश प्रभारी डॉ. शकील अहमद को संगठन बनाने और सामूहिक नेतृत्व तैयार करने के लिए भी कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा है।
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