इस तरह आयोग वार्डों का परिसीमन करने के दौरान उनमें जनसंख्या के साथ-साथ मतदाताओं की संख्या का भी संतुलन बनाने का प्रयास करेगा। दरअसल, वार्डों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, लेकिन राजधानी के अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2011 व वर्तमान समय जनसंख्या में भारी अंतर आ चुका है और कई विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2011 की जनसंख्या की तुलना में वर्तमान समय के दौरान मतदाताओं की संख्या अधिक है। इस कारण आयोग ने मतदाता सूची भी मांगी है। आयोग विधानसभा क्षेत्रवार जनसंख्या व मतदाताओं की संख्या का आकलन करने के बाद उनमें बनाए जाने वाले वार्डों की संख्या तय करेगा।
जीएसडीएल की मदद ली जाएगी
आयोग वार्डों की सीमा तय करने के मामले में जीएनसीटी की एक कंपनी जियो-स्पेशियल दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) की मदद लेगा। जीएसडीएल ने वर्ष 2016 के दौरान भी तीनों नगर निगमों के वार्डों का परिसीमन कराने में अहम भूमिका निभाई थी। जीएसडीएल विधानसभा क्षेत्रवार और वार्डवार गणना ब्लॉक (ईबी) के डिजिटल मानचित्रों के साथ डाटा तैयार कर रहा है।