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अपनी ही सरकार के खिलाफ हुए आप विधायक कर्नल सहरावत, आशीष खेतान को बताया दलाल 

Sun, 11 Sep 2016 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कर्नल देवेंद्र सहरावत
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आम आदमी पार्टी के विधायक कर्नल देवेंद्र सहरावत अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ फिर खुलकर सामने आ गए हैं। शनिवार को फिर से चिट्ठी लिखकर पार्टी संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के फैसलों की खुलकर आलोचना की है।
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इससे पहले भी वे चिट्ठी लिखकर संजय सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगा चुके हैं। यहां तक की विकास योजनाएं बनाने के लिए दिल्ली डायलॉग कमीशन (डीडीसी) को उन्होंने दिल्ली दलाल कमीशन और इसके उपाध्यक्ष आशीष खेतान को दलाल का तमगा दे डाला।

कर्नल सहरावत ने चिट्ठी में 21 संसदीय सचिवों पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा दिया है। उन्होंने लिखा की जब माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी व जया बच्चन की नियुक्ति को लाभ के पद के दायरे में मानते हुए इनकी नियुक्ति को अवैध ठहराया था, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
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यह जानते हुए भी कुछ सलाहकारों आशीष तलवार व अन्य के कहने पर 21 संसदीय सचिवों को नियुक्ति कर दिया, अब उनकी सदस्यता जाने का खतरा लटका हुआ है।

अब इसकी जिम्मेदारी आपकी है। जैसे-तैसे उन लोगों ने अपनी मेहनत का पैसा लगाकर चुनाव जीता था। आपने इन्हें दोबारा से चुनाव की राह पर खड़ा कर दिया। यही नहीं दिल्ली की जनता के ऊपर एक बार फिर चुनाव के खर्च का बोझ डाल दिया है।
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दिल्ली डायलॉग कमीशन की भूमिका पर उठाया सवाल

कर्नल देवेंद्र सहरावत
कर्नल सहरावत यहीं नहीं रुके, आगे उन्होंने लिखा की आपने (अरविंद केजरीवाल) जो दिल्ली डायलॉग कमीशन बनाया है, मुझे नहीं लगता इसकी जरूरत है। यह एक सफेद हाथी की तरह है जिसकी कार्यप्रणाली क्या है। इसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए।

प्रीमियम बस सर्विस को लेकर भी दिल्ली डायलॉग कमीशन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट में यह प्रस्ताव डीडीसी उपाध्यक्ष आशीष खेतान के दबाव में नियमों का उल्लंघन करके लाया गया।

जिससे कॉरपोरेट घरानों तक यह बात पहुंचाई जा सके कि आशीष खेतान दिल्ली सरकार के साथ दलाली करने के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं। उन्होंने लिखा है कि डीडीसी अब दिल्ली दलाल कमीशन बनकर रह गया है।

सहरावत ने बीते 4 सितंबर को लिखे अपने एक पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि, आपको हमने अवगत कराया था कि आपके मित्रमंडली जैसे आशीष तलवार, वैभव आदि मोटा वेतन पा रहे हैं जबकि संवैधानिक कार्यों से उनका कोई लेना देना नहीं है।
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