मुख्यमंत्री के अलावा भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र के जरिये महापौर ने नगर निगम के अधिकारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर के बिल भेजकर शहर की जनता पर दबाव बनाया जा रहा है। नगर आयुक्त के निर्देश पर शहर में अनाउंसमेंट कराकर नियमों को ताक पर रख संपत्ति कर की वसूली की जा रही है, जिससे कि शहर की जनता में भय का माहौल उत्पन्न हो रहा है। केंद्र और प्रदेश की सरकार के विरुद्ध माहौल बनाया जा रहा है। नगर निगम बोर्ड के 7 जनवरी 2023 के प्रस्ताव में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत या दो वर्ष के अंतराल में दस प्रतिशत संपत्ति कर वसूले जाने का प्रावधान किया गया था।
नगर निगम अधिनियम के अनुसार प्रत्येक दो वर्ष में एक बार संपत्ति कर की दरें निर्धारित की जा सकती हैं। मसलन, 31 मार्च 2025 तक संपत्ति कर में बढ़ोत्तरी नहीं की जा सकती। इस साल 9 जनवरी को बोर्ड बैठक के दौरान मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने अवगत कराया था कि विगत वर्ष में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। अब कारपेट एरिया के आधार पर टैक्स रिवीजन का कार्य कराया जा रहा है। संपत्ति कर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। नगर आयुक्त ने भी बोर्ड को अवगत कराया था कि संपत्ति दर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, लेकिन इसके बाद भी बढ़ी दरों पर कर वसूली की जाने लगी है।
महापौर ने बताया कि मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद एक मत से संपत्ति कर बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। गाजियाबाद शहर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में नगर निगम के अधिकारियों द्वारा शहर की जनता को भेजे जा रहे संपत्ति कर की बढ़ी दरों के नोटिस से पार्टी विरोधी माहौल बन सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री और संगठन के पदाधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।