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दिल्ली में बेघरों पर भारी पड़ रही हैं सर्द रातें, सरकार के दावे नाकाफी

Sun, 29 Dec 2019 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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एक रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला
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हाड़ गलाने वाली सर्दी में जब लोग अपने घरों में रजाईयों में सो रहे थे तब अमर उजाला की टीम ने राजधानी के कई इलाकों में सड़क पर रात गुजारने वालों का हाल जाना। रात ग्यारह बजे से सुबह तीन बजे तक अमर उजाला के संवाददाता सर्वेश कुमार, परीक्षित निर्भय और फोटो जर्नलिस्ट हिमांशु ने दिल्ली के रैन बसेरों से लेकर सड़कों पर कुछ इस तरह का हाल देखा... 

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रात साढ़े 11 बजे: धौला कुआं बस शेल्टर 
धौला कुआं पर बस क्यू शेल्टर के नीचे और पीछे खाना बना रहे कई ऐसे लोग दिखे जो यहीं बिना छत के सोने को मजबूर हैं। इन लोगों ने इस बस क्यू शेल्टर को ही अपना रैन बसेरा बनाया है। बस क्यू शेल्टर के पीछे और फ्लाईओवर के नीचे ठिठुरते हुए लोग यहां रात बिता रहे हैं। इन बेघर लोगों ने बताया कि आसपास कहीं भी रैन बसेरा न होने की वजह से ये जहां जगह दिखती है, वहीं सोने का ठिकाना बना लेते हैं। बस क्यू शेल्टर और फ्लोइ ओवर के पिलर के पीछे की जगह को चुनने के बारे में उन्होंने बताया कि यहां ठंडी हवा से बचाव हो जाता है। 

रात 12 बजे: सागरपुर बस स्टॉप 
सागरपुर बस स्टॉप पर कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने बस क्यू शेल्टर को ही रात का बसेरा बना लिया। इन लोगों ने बताया कि इनके पास भी रहने के लिए कोई जगह नहीं है और रैन बसेरे में भी उन्हें भीड़ होने के कारण जगह नहीं मिलती। इसलिए ये लोग बस स्टॉप पर ही कंबल ओढ़कर सो जाते हैं। बस क्यू शेल्टर की ओट में किसी ने ऑटो तो किसी ने रिक्शे को अपना बिस्तर बनाकर रात गुजारी। 
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रात साढ़े 11 बजे: शकरपुर में संतोषजनक मिला रैन बसेरा 
पूर्वी दिल्ली के शकरपुर में स्कूल ब्लॉक इलाके में बने रैन बसेरे में रात करीब साढ़े 11 बजे अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की। यहां रैन बसेरे की क्षमता से लगभग आधे लोग सोते हुए मिले। यहां साफ सफाई के साथ व्यवस्था भी संतोषजनक दिखी। हालांकि यहां सोते हुए लोगों से कोई बात नहीं हो सकी, लेकिन यहां दिल्ली के अन्य रैन बसेरों की अपेक्षा स्थिति काफी बेहतर थी।

एम्स के बाहर रैन बसेरे में लोगों ने लगाया कंबल में जूं होने का आरोप
एम्स के गेट नंबर एक के नजदीक अंडरपास में बने रैन बसेरे में मरीजों के तीमारदार रह रहे हैं। इन लोगों ने आरोप लगाया कि यहां पर सफाई नहीं है और कंबलों में जू भी हैं। कंबलों के बेहद बुरी बदबू आती है और शिकायत करने पर रैन बसेरे का स्टाफ उनके साथ बदसलूकी करता है। यहां पर लोगों के लिए प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएं भी नहीं हैं और टेंट में क्षमता से अधिक लोग रह रहे हैं।

रैन बसेरों में होनी चाहिये ये सुविधाएं
रैन बसेरों में बेघर लोगों के लिए सरकार की ओर से गद्दा, तकिया, रजाई, पानी, शौचालय व बिजली सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही सप्ताह में दो बार डॉक्टर यहां रह रहे लोगों की जांच करते हैं और निशुल्क दवा भी दी जाती हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी 
धौला कुंआ इलाके में रैन बसेरा बनाने की जगह नहीं है। एम्स में रैन बसेरा बनाने के लिए हमने एम्स प्रशासन को लिखित में अर्जी दी है लेकिन इस पर फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला है। अभी तक दिल्ली में ड्यूसिब के 193 पक्के रैन बसेरे चल रहे हैं। दिसंबर में ठंड बढ़ने के बाद अभी तक 77 अतिरिक्त अस्थाई टेंट वाले रैन बसेरे बनाए गए हैं। अगर कहीं किसी को रैन बसेरे की जरूरत है या कोई खुले में सोता मिलता तो उसके लिए ड्यूसिब के हैल्प लाइन नंबर 01123378789 और 23370560 या रैन बसेरा मोबाइल ऐप पर संपर्क कर सकते हैं।
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-विपिन राय, ड्यूसिब सदस्य

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