दनकौर कस्बे में दलित परिवार के पांच सदस्यों के निर्वस्त्र होकर पुलिस से उलझने के मामले की जांच करते हुए यूपी एससी-एसटी आयोग ने पुलिस को क्लीन चिट दी है।
साथ ही, अश्लीलता फैलाने के आरोप में दलित परिवार पर सख्त कार्रवाई करते हुए रासुका लगाने के निर्देश दिए हैं। हैरानी की बात है कि आयोग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में घटना के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की गैर मौजूदगी वाले बिंदु का जिक्र तक नहीं किया।
शुक्रवार को यूपी एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ के साथ सात सदस्यीय टीम दनकौर में जांच के लिए पहुंची।
जांच में पुलिस की कोई गलती सामने नहीं आई
स्थानीय पुलिस ने पहले ही सैकड़ों लोगों को सफाई देने के लिए तैयार किया हुआ था। जांच टीम ने घटना स्थल पर आसपास के लोगों से बातचीत कर साक्ष्य जुटाए गए।
नगर पंचायत कार्यालय में बैठकर एक-एक कर कई लोगों से घटना के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद आयोग के उपाध्यक्ष ने प्रेसवार्ता कर दनकौर पुलिस को इस मामले में दोषी न मानते हुए क्लीन चिट दे दी।
मुकेश सिद्धार्थ ने बताया कि आयोग ने उन्हें पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के लिए भेजा था, लेकिन जांच में पुलिस की कोई गलती सामने नहीं आई है।
महिला पुलिस की गैर मौजूदगी का जिक्र नहीं
दूसरी ओर, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आयोग के उपाध्यक्ष ने शासन को भेजी गई रिपोर्ट में भी महिला पुलिस की गैर मौजूदगी का जिक्र तक नहीं किया है।
दिल्ली के एससी-एसटी आयोग की टीम भी इस मामले में जांच के लिए दनकौर पहुंची। आयोग के डायरेक्टर कन्हैया लाल ने बताया कि टीम ने घर जाकर परिजनों के बयान लिए हैं।
मामले की गहनता से जांच करने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद ही आयोग की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।