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CJP Protest: दिल्ली हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा, छात्रों पर लाठीचार्ज मामले पर केंद्र को नोटिस

Wed, 22 Jul 2026 04:13 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो संरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसकी अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
 
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छात्रों पर लाठीचार्ज मामले में हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और दृश्य संरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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यह याचिका कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को चुनौती देती है। इसमें छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का जिक्र है। याचिका में 18 जुलाई को हुए अभियान की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही, सबूतों को सुरक्षित रखने और शांतिपूर्ण विरोध के सांविधानिक अधिकार की रक्षा के लिए दिशानिर्देश बनाने की भी मांग की गई है। 

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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में बहस की। उन्होंने बताया कि छात्र NEET परीक्षा से संबंधित अपनी शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। यह प्रदर्शन लगभग 20 दिनों से चल रहा था और इस दौरान कोई हिंसा नहीं हुई थी। 

अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि पुलिस ने बिना चेतावनी दिए लाठियों का इस्तेमाल किया। इनमें से कुछ लाठियों में कीलें लगी हुई थीं। पुलिस ने पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और टेजर का भी प्रयोग किया।
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पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि महिलाओं के साथ बदसलूकी और निजी अंगों पर हमले के आरोप भी लगाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों की वर्दी पर नाम पट्टिका नहीं लगी थी। इससे उनकी पहचान छिपाई जा रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से घटना के दृश्य देखने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ताओं ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और दृश्य सामग्री संरक्षित करने की मांग की है। इसके साथ ही, एक स्वतंत्र एसआईटी जांच कराने की भी मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस घटना में 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं। अदालत ने दृश्य देखने का आश्वासन दिया है और मामले की सुनवाई जारी है।
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