याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में बहस की। उन्होंने बताया कि छात्र NEET परीक्षा से संबंधित अपनी शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। यह प्रदर्शन लगभग 20 दिनों से चल रहा था और इस दौरान कोई हिंसा नहीं हुई थी।
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि पुलिस ने बिना चेतावनी दिए लाठियों का इस्तेमाल किया। इनमें से कुछ लाठियों में कीलें लगी हुई थीं। पुलिस ने पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और टेजर का भी प्रयोग किया।
पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि महिलाओं के साथ बदसलूकी और निजी अंगों पर हमले के आरोप भी लगाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों की वर्दी पर नाम पट्टिका नहीं लगी थी। इससे उनकी पहचान छिपाई जा रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से घटना के दृश्य देखने का अनुरोध किया।
याचिकाकर्ताओं ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और दृश्य सामग्री संरक्षित करने की मांग की है। इसके साथ ही, एक स्वतंत्र एसआईटी जांच कराने की भी मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस घटना में 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं। अदालत ने दृश्य देखने का आश्वासन दिया है और मामले की सुनवाई जारी है।