जिला स्वास्थ्य विभाग की नींद इन दिनों एक इंजेक्शन ने उड़ा रखी है। संक्रमण रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले इस इंजेक्शन को लेकर कई राज्यों में हड़कंप मचा है। चूंकि यह इंजेक्शन प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में भी लगाया जा रहा है, लिहाजा इसकी गुणवत्ता जांचने की तैयारी चल रही है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सिप्रोफ्लेक्सेसिन नाम का यह इंजेक्शन मरीज को संक्रमण से बचाने के लिए लगाया जाता है। हाल ही में मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस इंजेक्शन की गुणवत्ता जांचने के आदेश दिए हैं।
शिकायत है कि यह इंजेक्शन तय मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। इस इंजेक्शन को लगाने के बाद मरीज सर्दी से ठिठुरने लगता है। चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस इंजेक्शन की गुणवत्ता जांचने के लिए संबंधित कंपनी को कई बार पत्र भी लिखा। इसके बावजूद कंपनी की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं मिला।
यह स्थिति बेहद ही गंभीर है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में भी यह इंजेक्शन जरूरी दवाओं की सूची में शुमार है। हालांकि अभी तक इसके साइड इफेक्ट का कोई मामला सामने नहीं आया है।
लेकिन मध्य प्रदेश में इस इंजेक्शन को लेकर मचे हड़कंप के बाद इसकी गुणवत्ता जांचना बेहद जरूरी हो गया है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए बाकायदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जल्द ही, इस पर कोई ठोस कदम सामने आ सकता है।
कई रोगों से लड़ता है यह इंजेक्शन
सिप्रोफ्लोक्सेसिन इंजेक्शन शरीर के भीतर कई प्रकार के संक्रमण से लड़ने में सहायक होता है। अगर आप मांसपेशियों के आराम के लिए कोई दवा ले रहे हैं तो इस इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं हो सकता। इसके इस्तेमाल को लेकर कई प्रकार की गाइड लाइन हैं। चिकित्सक इसे इस्तेमाल करने से पहले इन तमाम गाइड लाइन्स का अनुसरण करते हैं ताकि साइड इफेक्ट की संभावना को रोका जा सके। खास बात है कि कंपनी ने भी इसे लेकर निर्देश जारी कर रखे हैं। यही कारण है कि स्थिति स्पष्ट न होने तक आला अधिकारी भी इस बाबत कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
इनके लिए सावधानी जरूरी
- ह्रदय रोग के मरीज, विशेषकर तब जब कि वह इसके लिए दवा ले रहे हों,
- मांसपेशियों में दिक्कत, अर्थराइटिस और जोड़ों में दिक्कत,
- किडनी में दिक्कत, सिर पर लगी कोई पुरानी चोट या ब्रेन ट्यूमर,
- डायबिटिक, खून में पोटाशियम की मात्रा का बेहद कम होना इत्यादि।