गोल्फर टाइगर वुड्स की भतीजी चियेने वुड्स अपने अंकल से नहीं, बल्कि दादा अर्ल टाइगर से गोल्फ की बारीकी सीखी। टाइगर वुड्स को देखते हुए जरूर बड़ी हुई, लेकिन उनके करियर में सबसे अधिक योगदान उनके दादा का रहा है।
यह खुलासा खुद चियेने वुड्स ने किया है। वो यहां डीएलएफ गोल्फ क्लब में चल रहे वर्ल्ड वुमेन गोल्फ टूर्नामेंट में हिस्सा लेने आई है।
भारत दौरे पर पहली बार आई 25 साल की अमेरिकी प्रोफेशनल गोल्फर चियेने वुड्स को महिला गोल्फ की दिशा बदलने के साथ सबसे कामयाब महिला गोल्फर माना जाता है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा बचपन से स्पोर्ट्स का शौक था। टीवी पर जब अंकल वुड्स को देखती थी, लोग उनकी कद्र करते हैं। तब से ही इस खेल का शौक हुआ, मगर इनके करियर में मेरा खास योगदान नहीं रहा।
सबसे अधिक योगदान दादा जी का रहा। बतौर कोच उन्होंने मुझे खेल की बारीकी के साथ करियर के लिए जरूरी टूर्नामेंट के लिए तैयार किया। गोल्फ ट्प्सि के बारे में हंसते हुए कहती है, अंकल वुड्स से ज्यादा से दादा जी ने मदद की।