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ऑनलाइन बिक रही 'मौत' की डोर: बैन के बावजूद मिल रहा है चीनी मांझा, इन राज्यों से हो रही दिल्ली में डिलीवरी

Thu, 08 Aug 2024 07:42 PM IST
Vikas Kumar आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ लोग वेबसाइट बनाकर, तो कई लोग इसे सोशल मीडिया साइट पर खुले आम बेच रहे हैं। ऑनलाइन चीनी मांझे की एक चरखी की कीमत करीब साढ़े पांच सौ रुपये से शुरू है। 
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ऑनलाइन बिक रहा चाइनीज मांझा - फोटो : iStock
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में दूसरे राज्यों से 'मौत' के मांझे की डिलीवरी ने चिंता बढ़ा दी है। मांझा विक्रेता बेखौफ होकर धड़ल्ले से ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश से प्रतिबंधित चीनी मांझे दिल्ली पहुंच रहे हैं। न पुलिस का खौफ और न ही प्रशासन की कार्रवाई का डर इन विक्रेताओं में दिखता है। ऑनलाइन वेबसाइट बनाकर यह खुले आम अलग-अलग नामों से चीनी मांझा बेच रहे हैं। इसके लिए वह ऑनलाइन ऑर्डर ले रहे हैं। यही नहीं, मांझा विक्रेता इतने चौकस हैं कि वह किसी भी तरह पुलिस की पकड़ में न आएं इसके लिए डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसमें केवल कैश ऑन डिलीवरी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मांझे से घायल लोग व पक्षियों की संख्या बढ़ सकती है।

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15 अगस्त करीब है। इसके जश्न की तैयारियां जोरो-शोरो से चल रही हैं। आसमान में रंग-बिरंगी पतंग उड़ना शुरू हो गई हैं। पतंगों के शौकीन एक-दूसरे की पतंग काटने के लिए अपने घरों की छत पर नजर आने लगे हैं। लेकिन, बावजूद इसके लापरवाही बरती जा रही है। बाजारों में कुछ सख्ती तो देखने को मिली है, पर अब भी बिक्री पूरी तरह से बंद नहीं हुई है। पतंगबाजी के दौरान इस मांझे की चपेट में आकर बीते वर्षों कई लोगों के जीवन की डोर टूट चुकी है। सबसे अधिक खतरा दो पहिया वाहनों को होता है।

इंडस्ट्रियल यूज ने नाम पर बिक रहा है प्रतिबंधित मांझा
कुछ लोग वेबसाइट बनाकर, तो कई लोग इसे सोशल मीडिया साइट पर खुले आम बेच रहे हैं। ऑनलाइन चीनी मांझे की एक चरखी की कीमत करीब साढ़े पांच सौ रुपये से शुरू है। आलम यह है कि दुकानदार खरीदारों को पहले से ऑर्डर देने के लिए कह रहे हैं। वहीं, 15 अगस्त से पहले ऑर्डर लेने के लिए अधिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है। इसी कड़ी में इंटरनेट पर लक्की पतंग सेंटर नाम से एक वेबसाइट है। यहां सामान पतंग का मिल रहा है। लेकिन, चीनी मांझे को इंडस्ट्रियल यूज के नाम पर भ्रमित कर बेचा जा रहा है। इसका पता पंजाब का है, जोकि ऑनलाइन ऑर्डर ले रहा है।

प्रतिबंधित होने के बाद भी बिक रहा है चीनी मांझा
ओखला, जनकपुरी, तुर्कमान गेट समेत कई बाजारों में चोरी-छिपे चीनी मांझा कोड वर्ड में बिक रहा है। यह बुकिंग में ही बिक रहा है। दुकानदारों ने बताया कि यह मांझा किसी चरखी में नहीं, बल्कि साधे कागज में बेच रहे हैं। तुर्कमान गेट के एक दुकानदार कहते हैं कि चीनी मांझा मिल रहा है, लेकिन उसके लिए पहले से ऑर्डर देना होगा। पुरानी दिल्ली के बाजार लाल कुआं में पतंग की खरीदारी करने आए यश सिंह ने कहा कि चीनी मांझा को बाजार में बेचने पर प्रतिबंध लगा है। लेकिन, इसके बाद भी प्रशासन खानापूर्ति के लिए कुछ कार्रवाई करके अपना पल्ला झाड़ रहा है। इसकी वजह से चीनी मांझे बिक रहे हैं। इस बारे में लोगों को भी जागरूक होने की जरुरत है। अगर लोग बाजार में इन मांझों को खरीदेंगे ही नहीं, तो यह बनना ही बंद हो जाएंगे।

यह है चीनी मांझा
पतंग व मांझा विक्रेताओं के मुताबिक चीनी मांझा नायलॉन के धागे में मैटेलिक पाउडर मिलाकर बनाया जाता है। नायलॉन के धागे पर कांच और लोहे को पीस कर धागे पर धार लगाई जाती है। ये प्लास्टिक जैसा दिखता है और स्ट्रेचेबल होता है। इसे खींचते हैं तो टूटने के बजाय बढ़ जाता है। इसे काटना मुश्किल होता है।
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सोशल मीडिया में जागरुक कर रहे हैं लोग
चीनी मांझे के खिलाफ सोशल मीडिया में मुहीम चल रही है। लोग इसे इस्तेमाल न करने के लिए गुजारिश कर रहे हैं। जबकि, लोग एक-दूसरे को इस मांझे से बचने के लिए भी गुहार लगा रहे हैं। इस कड़ी में एक संदेश खूब वायरल हो रहा है। इसमें सभी दोपहिया वाहन चालकों से निवेदन किया है कि 15 अगस्त तक गले को रूमाल या किसी कपड़े से ढक कर वाहन चलाएं और पतंग के मांझे से सावधानी बरतें।

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