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सोरायसिस की चपेट में युवाओं के साथ बच्चे भी

Sun, 22 Nov 2015 08:14 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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अनियमित जीवनशैली और भागदौड़ भरी दिनचर्या वाले व्यक्तियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि नियमित व्यायाम से दूर और उल्टा सीधा खानपान वाले लोग इस समय तेजी से बढ़ रही सोरायसिस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
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सोरायसिस (ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर) 30 से 40 साल के युवाओं के साथ-साथ पांच से 15 वर्ष के बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। इस समय चिकित्सकों के पास 15 से 20 फीसदी मरीज सोरायसिस के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

सफेद छिल्केदार हो जाती है त्वचा
स्किन से जुड़ी बीमारी सोरायसिस से पीड़ित व्यक्ति की त्वचा सफेद छिल्केदार हो जाती है। बीमारी का प्रभाव हाथ, पैर और सिर में अधिक रहता है। बाद में नखूनों और जोड़ों में प्रभाव बढ़ता है।
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खुजली और जलन से असहनीय पीड़ा होती है। स्किन के ऊपर की लेयर खराब होने से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटने के साथ इसका लिवर पर सीधा असर पड़ता है।

एक-दूसरे से नहीं फैलती बीमारी
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. भावुक मित्तल ने बताया कि इस बीमारी से पूरी दुनिया में एक प्रतिशत लोग ग्रस्त हैं। सोरायसिस एक-दूसरे से नहीं फैलती। इसलिए इस बीमारी से पीड़ित लोगों से दूर न भागें और घबराएं भी नहीं।

समाज में फैली भ्रांति को भी दूर करें। बीमारी से पीड़ित लोग स्ट्रॉराइड का प्रयोग नहीं करें। यह पहले तो आराम देगी, लेकिन फिर परेशानी और बढ़ जाएगी। सर्दियों में बीमारी से परेशानी बढ़ती है, इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें।
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बीमारी के प्रमुख कारण:
तनाव
अनियमित जीवनशैली
व्यायाम का अभाव, मदिरा सेवन व धूम्रपान
तेलीय व हैवी खानपान
वंशानुगत

बीमारी से बचाव और उपचार के तरीके
सादा खानपान में दाल, पनीर का करें प्रयोग
प्रतिदिन योगा
समय से उठे और सोएं
नियमित स्नान और साफ-सफाई का ध्यान
धूम्रपान और मदिरा का प्रयोग वर्जित
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