इटली से लौटे शोधार्थी भुवनेश्वर के से दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की पूरी संभावना है क्योंकि आईआईटी गेस्ट हाउस के आठ कर्मी सीधे कोरोना पॉजीटिव शोधार्थी के संपर्क में आए थे।
संस्थान ने मंगलवार से लेकर बुधवार तक अस्पताल, स्थानीय प्रशासन से लेकर हेल्पलाइन पर हजारों कॉल करके मदद मांगी पर कोई फायदा नहीं हुआ। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च अधिकारी के दखल के बाद बृहस्पतिवार को इन सभी आठ कर्मियों की जांच होगी। खास बात यह है कि इनमें से पांच कांट्रेक्ट कर्मी कैंपस से बाहर अपने घरों को लौट गए हैं।
आईआईटी दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक, सोमवार से बुधवार शाम तक इन कर्मियों की जांच से लेकर पॉजीटिव मरीज के ठहरने वाले गेस्ट हाउस को सैनिटाइज करने की मांग करता रहा लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची। इसके बाद आईआईटी प्रशासन ने खुद ही उसे सैनिटाइज करवाया। मंगलवार को आठ में से पांच कांट्रेक्ट कर्मियों को वेतन सहित 14 दिन के एकांतवास का निर्देश दिया था। वहीं तीन कर्मी कैंपस में ही रहते हैं। पांच कर्मी यदि कोरोना पॉजीटिव वायरस की चपेट में आए होंगे तो उनके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति से यह वायरस को आगे बढ़ेगा क्योंकि यह कर्मी आम कॉलोनियों में रहते हैं और बस या मेट्रो से सफर करते हैं।
विदेश से लौटे पांच छात्रों की कैंपस में की जा रही निगरानी
सूत्रों के मुताबिक, आठ दिन पहले आईआईटी के छह छात्र विदेश से लौटे हैं। इनमें से यूएस से लौटे पांच छात्रों को कैंपस में ही एकांतवास में रखा गया है। वहीं नार्वे से लौटा एक छात्र अपने घर चला गया है। आईआईटी प्रशासन ने इन सभी छह छात्रों को केंद्र सरकार के बड़े अस्पताल में आठ दिन पहले जांच के लिए भेजा था, लेकिन अस्पताल ने जांच करने से मना कर दिया क्योंकि उस समय उनको बुखार, सर्दी-खांसी या जुकाम के लक्षण नहीं थे। हालांकि अब आईआईटी प्रशासन ही उन छात्रों की देखरेख कर रहा है।