सिंघवी ने अदालत को बताया कि यह याचिकाकर्ता का पक्ष है कि जब सुरक्षा चूक के लिए दिल्ली पुलिस जिम्मेदार थी, तो उसे अब इसकी जांच करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए और पुलिस की मौजूदगी में सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर दिया था। पिछली सुनवाई पर डीसीपी (उत्तर) ने अदालत को सूचित किया था कि घटना से संबंधित मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 14 दिनों तक हिरासत में रहे, जिसके बाद उन्हें अदालत से जमानत दे दी गई।
पुलिस ने अदालत को बताया कि था कि अधिक सशस्त्र गार्डों की तैनाती के साथ सीएम आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने सीएम के साथ बर्बरता की घटना को रोकने में पुलिस की विफलता पर नाराजगी व्यक्त की थी और पुलिस आयुक्त को गंभीर चूक के लिए जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया था, इसे बहुत परेशान करने वाली स्थिति करार दिया था। याची ने हमले की जांच के लिए एक एसआईटी के गठन की मांग की है और तर्क दिया है कि द कश्मीर फाइल्स पर उनकी टिप्पणी के विरोध में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में तोड़फोड़ की गई। दिल्ली पुलिस की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया गया है। 30 मार्च, 2022 को, कई भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विरोध की आड़ में दिल्ली के सीएम के आधिकारिक आवास पर हमला किया।