ज्वेलरी मार्केट दरीबा कलां, कूचा महाजनी के जूलरों ने अपनी तरफ से तैयारियां पूरी कर ली हैं। चांदी के सिक्के, चांदी के बर्तन, गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति, सोने की गिन्नी, एनटिक सिक्का, जाली वाली चौकी समेत कई गिफ्ट आइटम बाजार में उपलब्ध हैं।
ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल का कहना है कि धनतेरस पर कूचा महाजनी बाजार में भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। चांदी के सिक्के खरीदने ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि इस बार सोने का भाव चढ़ने की वजह से व्यापार कुछ कम होने की संभावना है, बावजूद 500 करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद है। दस ग्राम चांदी का सिक्का बाजार में 1000 रुपये में बिक रहा है। इसी तरह 8 ग्राम की गिन्नी 60 हजार रुपये कीमत की है। सोने का सिक्का 5 ग्राम वाला 45 हजार रुपये का है। कूचा महाजनी के ज्वेलर प्रेम प्रकाश ने बताया कि इन दिनों युवाओं का रुझान ब्रांडेड जूलरी पर ज्यादा है। यही वजह है कि पारंपरिक दुकानों की स्थिति पहले की तरह नहीं है।
बर्तनों का बाजार गर्म
डिप्टी गंज, लाजपत नगर, शाहदरा, लक्ष्मी नगर, वजीरपुर समेत स्थानीय मार्केट में बर्तन बाजार स्टील के बर्तनों से पटे पड़े हैं। मंगलवार को धनतेरस पर बाजारों में विशेष तैयारियां की गई है। महंगाई के बावजूद लोगों की भीड़ खरीदारी में जुटी हुई है। किसी को बर्तन का पूरा सेट चाहिए तो कोई कशीदा वाला बर्तन व शर्बत सेट खरीद रहा है। वहीं पीतल के बर्तन के खरीदारों की भी कमी नहीं है।
व्यापारियों को वित्तीय संकट से मिलेगी मुक्ति : सीटीआई
व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कहा कि व्यापारिक समुदाय को वित्तीय संकट से मुक्ति मिलने की भी उम्मीद है। सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार दिवाली उत्सव पर दिल्ली में एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के शीर्ष संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल की कुल खुदरा बिक्री में 55 फीसदी की भारी वृद्धि हुई है। वाहनों की सभी श्रेणियों में टू व्हीलर, थ्री व्हीलर, वाणिज्यिक वाहन, निजी वाहन और ट्रैक्टरों में 52, 115, 48, 70 और 58 फीसदी की अत्यधिक उच्च वृद्धि हुई है।
आकर्षण का केंद्र बने सजावटी दीये
बाजार में सजावटी दीयों की भरमार है। फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के चेयरमैन परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के कारण चीन का सस्ता सजावटी सामान बाजारों में कम पहुंच रहा है।