दिल्ली हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में मांगा जवाब, 18 नवंबर को अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी वाले रिफिल की बुकिंग में अनिवार्य बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वकील पुलकित लूथरा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 75 प्रतिशत स्थायी दृष्टिबाधिता वाले याचिकाकर्ता को अनिवार्य बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (बीएए) में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका के मुताबिक, आइरिस प्रमाणीकरण की अनिवार्यता दृष्टिबाधित लोगों के लिए भी गंभीर परेशानी पैदा कर रही है।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग व्यक्तियों की जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा। उनके अनुसार, सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना जरूरी था।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने दलील दी कि सरकार का फैसला आधार संबंधी कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि एक अक्तूबर से पुरानी व्यवस्था के तहत एलपीजी आपूर्ति बंद हो गई है। उन्होंने अदालत से अगली सुनवाई पर अंतरिम राहत देने के अनुरोध पर विचार करने की अपील की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की है।