23 मार्च को वह जब कंप्यूटर का पेपर लेने यूनियन बैंक गया था। उसी दौरान उसने ब्रांच मैनेजर शेरूराम और हेड कैशियर ओमप्रकाश की मौजूदगी में इकोनॉमिक्स और मैथ्स के पेपर के बंडल भी निकाल लिये थे।
12वीं का पेपर तो आरोपी ने अमित व अशोक को सौंप दिया था। लेकिन 10वीं कक्षा के पेपर का बंडल उसने अपने पास रखा। बाद में उसे भी लीक करा दिया गया।
चूंकि ब्रांच मैनेजर शेरूराम व मुख्य कैशियर ओमप्रकाश सीबीएसई की गाइड लाइंस के अनुसार पेपर के कस्टोडियन थे, इसलिए दोनों भी अपराध में बराबर के साझेदार थे। पुलिस ने बृहस्पतिवार को दोनों को ऊना से गिरफ्तार कर लिया। वहीं मंजू को फिरोजपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
पांच दिन पहले ही हो गया था मैथ्स का पेपर लीक...
पुलिस की पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी राकेश ने बताया कि मैथ्स का पेपर होने से पांच दिन पूर्व 23 मार्च को ही उसने पेपर बैंक के स्ट्रांग रूम से निकाल लिया था। मैथ्स का पेपर निकालने के बाद उसने पेपर को अपनी कार में रख दिया। बड़ी सावधानी से पेपर की सील खोल दी गई। राकेश ने पहले पेपर के मोबाइल से फोटो खींचे। इसके बाद उसने अपने एक छात्र को जिसे वह ट्यूशन पढ़ता था अपने घर बुलाया। छात्र से उसकी हैंडराइटिंग में पेपर की कॉपी करने के लिए कहा गया। छात्र ने पेपर देखने के बाद उसको कॉपी कर दिया। बाद में उसे आगे व्हाट्सऐप पर सर्कुलेट कर दिया गया।
राकेश ने खुलासा किया कि उसकी फिरोजपुर में रहने वाली रिश्ते की भाभी मंजू ने उससे कहा था कि उसकी मैनेमेंट में जुगाड़ है। वह अपनी सिफारिश से उसे प्रिंसिपल बनवा देगी। राकेश मंजू से काफी प्रभावित था। दरअसल राकेश को पीजीटी कॉमर्स टीचर का नौ साल का अनुभव था। 10 साल अनुभव के बाद ही वह प्रिंसिपल बनने के लिए अवेदन कर सकता था।
मंजू ने उसे झांसा दिया कि उसकी पहचान मैनेजमेंट में है और वह उसे आसानी से प्रिंसिपल बनवा देगी। उससे प्रभावित होकर राकेश ने पहले मंजू को 12वीं का पेपर व्हाट्सऐप किया। बाद में 10वीं का पेपर भी उसे व्हाट्सऐप कर दिया।
मंजू के जरिय पंचकुला होता हुआ दिल्ली पहुंचा मैथ्स का पेपर...
23 मार्च को जवाहर नवोदय विद्यालय में पेपर कराने के बाद राकेश ने अपनी कार में ही बैठकर मैथ्स का पेपर बंडल से निकाला। बाद में उसकी मोबाइल से फोटो खींच कर घर आ गया। उसके बाद छात्र से कॉपी करवाने के बाद आरोपी ने मंजू को छात्र की हैंडराइटिंग में पेपर फिरोजपुर भेज दिया।
मंजू ने आगे पेपर अपनी बहन मीना (बदला हुआ नाम) को पंचकुला भेज दिया। मीना ने पेपर अपनी एक जानकार के पास पश्चिम विहार दिल्ली में भेज दिया। वहां से धीरे-धीरे पेपर बटता चला गया। इसके बाद कई व्हाट्सऐप ग्रुप पर पेपर वायरल हो गया।