देहात क्षेत्र के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। 785 पेयजल नमूनों की जांच में सात फीसदी नमूने शुद्धता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। ग्रामीण पेयजल स्वच्छता समिति की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता, अनुसरण एवं निगरानी कार्यक्रम के तहत ग्राम्य विकास और जल निगम ने प्रत्येक गांव में एक वाटर टेस्टिंग किट ग्रामीण पेयजल स्वच्छता समिति को दी थी। समिति का मुख्य कार्य सभी सरकारी हैंडपंपों से लिए पेयजल नमूने की टेस्ट किट के माध्यम से जांच करना था।
समिति ने अगस्त से अब तक बुलंदशहर सदर समेत खुर्जा, सिकंदराबाद, जहांगीराबाद, अनूपशहर, शिकारपुर, डिबाई, औरंगाबाद, लखावटी, अरनिया, पहासू, गुलावठी, अगौता, स्याना, बीबीनगर और दानपुर क्षेत्र के गांवों से दो चरणों में 655 और 130 नमूने भरे और जांच की। जांच में सात फीसदी यानी 55 नमूनों की रिपोर्ट नकारात्मक आई। पानी में रासायनिक अशुद्धियों के साथ सिल्ट एवं मिट्टी अपेक्षाकृत अधिक है।
सदर का पानी खतरनाक
ग्रामीण स्वच्छता समिति की रिपोर्ट के बाद पेयजल सैंपल और रिपोर्ट की क्रास चेकिंग होती है। काउंटर चेकिंग में बुलंदशदर सदर के 20 नमूनों में 5 नमूने खतरनाक स्तर तक फेल पाए गए। इसलिए ग्राम स्वच्छता समिति की रिपोर्ट को कम नहीं आका जा सकता।
समिति के सदस्यों को मिलती है ट्रेनिंग
ग्रामीण पेयजल स्वच्छता समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण शिविर में बाकायदा दो माह की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेेनिंग में नमूना लेने का तरीका और जांच की वैज्ञानिक तकनीक सिखाई जाती है।