बीआरएस नेता के. कविता
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बीआरएस नेता के कविता की याचिका पर सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की। इसमें दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई द्वारा उनकी गिरफ्तारी और उन्हें सीबीआई हिरासत में भेजने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। दरअसल, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट रोस्टर में बदलाव के कारण मामले को अपने बोर्ड से मुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ ने मामले को उचित पीठ के समक्ष 31 जुलाई के लिए तय किया।
के कविता ने सीबीआई मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में कहा कि सीबीआई मामले में उनकी गिरफ्तारी और कारावास की ओर ले जाने वाली पूरी कार्यवाही कानून के लिए अभिशाप है और उन मौलिक सिद्धांतों का उल्लंघन है, जिनके आधार पर जांच एजेंसी के साथ-साथ अदालत के पास एक ऐसे व्यक्ति के रूप में निहित शक्तियों का परस्पर प्रभाव पड़ता है जो पहले से ही किसी अन्य (ईडी) मामले में हिरासत में है। जिसके परिणामस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 (1) और (2) के तहत याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
के कविता द्वारा दी गई याचिका में कहा गया है कि वह दो बच्चों की मां हैं, जिनमें से एक नाबालिग है जो वर्तमान में सदमे में है और उसका चिकित्सकीय पर्यवेक्षण किया जा रहा है। कविता ने अपनी नई जमानत याचिका में आरोप लगाया इसलिए, गिरफ्तारी आदेश में व्यक्त अपराध की संतुष्टि केवल दिखावा और दिखावा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के कविता के खिलाफ दायर अपने आरोपपत्र में कहा कि वह दिल्ली आबकारी नीति मामले में हेरफेर और छेड़छाड़ में शामिल थीं। जांच के दौरान आरोपी के कविता की भूमिका न केवल अग्रिम धन के संग्रह में बल्कि हवाला चैनल के माध्यम से गोवा में अवैध धन के हस्तांतरण में भी सामने आई है।