दिल्ली दंगों के दौरान शिव विहार में एक परिवार के घर में दंगाइयों ने तोड़फोड़ की। पीड़ितों ने जिला प्रशासन के सामने चार से पांच लाख रुपये के मुआवजे का आवेदन किया। लेकिन जिला प्रशासन की टीम मौका मुआयना किए बगैर ही लौट गई।
टीम को पीड़ित के पड़ोसी ने बताया था कि वहां कोई प्रभावित नहीं रहता। इसी तरह एक अन्य मामले में पीड़ित से मोबाइल फोन पर बात नहीं होने की वजह से मुआवजे का आवेदन रद्द कर दिया गया था। दिल्ली वक्फ बोर्ड की समीक्षा में यह बात सामने आई है।
दिल्ली दंगा पीड़ितों से जुड़े इस तरह के करीब 748 मामले हैं, जिसमें प्रशासन ने मुआवजा देने से इंकार कर दिया था। विधानसभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति ने इन सभी मामलों की समीक्षा करने के आदेश दिल्ली वक्फ बोर्ड को दिए थे। बोर्ड ने अभी तक करीब 160 मामलों की जांच कर ली है। इसमें से ज्यादातर लोगों को मामूली वजहों के आधार पर मुआवजा नहीं दिया गया।
बोर्ड के मुताबिक, मौजपुर इलाके के एक डेंटिस्ट को इसलिए मुआवजा नहीं दिया गया क्योंकि दंगों के तुरत बाद उन्होंने अपने क्लीनिक की मरम्मत करा ली थी। जबकि उसका लाखों में नुकसान हुआ था। वक्फ बोर्ड के सेक्शन अधिकारी महफूज मोहम्मद का कहना है कि कुल 748 मामलों में से 160 मामलों की समीक्षा की गई है।
उसमें से ज्यादा मामलों में मुआवजा मामूली वजहों से रद्द हुआ है। जबकि बाकी की समीक्षा की जा रही है। 7 अक्तूबर को दिल्ली विधानसभा के अल्पसंख्यक कल्याण कमेटी की बैठक में ज्यादातर मामलों की जांच हो जाएगी और उन्हें कमेटी के सामने रखा जाएगा। इसके आधार पर कमेटी आगे प्रशासन को उचित निर्देश देगी।