दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार का कॉलेजों में सीटें बढ़ाने का वायदा पूरा नहीं होने के कारण दिल्ली के डेढ़ लाख विद्यार्थियों को कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल पाया है।
वे पढ़ाई जारी रखने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उधर, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री छात्रों को प्रवेश में आरक्षण देने की मांग को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। यदि सरकार ने विद्यार्थियों के भविष्य पर ध्यान दिया होता तो दिल्ली के सभी कॉलेजों में सीटें दोगुनी हो सकती थीं। इससे छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बच जाता।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार पिछले डेढ़ साल से सत्ता में है, लेकिन उसने एक भी नया कालेज नहीं खोला है। जबकि चुनाव के समय आम आदमी पार्टी ने वायदा किया था कि दिल्ली में 20 नए कॉलेज खोलेगी।
वायदे के अनुसार उसने डेढ़ साल में अब तक छह नए कॉलेज खोल देने थे। इस बारे में दिल्ली सरकार की ओर से दोषारोपण केंद्र सरकार पर किया जा रहा हैं। इतना ही नहीं, जनता को गुमराह करने के लिए मुख्यमंत्री मांग कर रहे हैं कि दिल्ली के विद्यार्थियों को सभी कालेजों में दाखिले में पांच प्रतिशत अंकों का आरक्षण दिया जाए।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर वर्ष ढाई लाख विद्यार्थी 12वीं पास करते हैं, जबकि कॉलेजों में सिर्फ 90 हजार विद्यार्थियों का प्रवेश हो सकता है। इस तरह हर वर्ष डेढ़ लाख विद्यार्थी निजी कालेजों और निजी विश्वविद्यालयों में लाखों रुपये की फीस देकर पढ़ाई करने को मजबूर किए जाते हैं।
इसके अलावा जिन अभिभावकों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है वे अपने बच्चों को घर बैठाने पर या छोटी मोटी नौकरी व कारोबार करवाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।