विवादों के बीच मैक्सफोर्ट स्कूल की रोहिणी व पीतमपुरा की दोनों शाखाओं में आम दिनों की तरह ही बृहस्पतिवार को कक्षाएं लगीं। हालांकि स्कूल में सुबह से शाम तक शिक्षा निदेशालय व कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर व अधिकारी भी मौजूद रहे।
यहां उन्होंने कुछ जरूरी दस्तावेज को अपने हाथ में लिया। जिससे कि इन दस्तावेज के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। दरअसल, लोकल कमिश्नर को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट देनी है।
इस कारण से स्कूल में बृहस्पतिवार को कोर्ट व शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों की आवाजाही रही। बताया जा रहा है कि स्कूल में टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ कितना है, बच्चों की संख्या कितनी है, कौन अस्थायी है व कौन स्थायी इस संबंध में भी जानकारी ली गई है।
वहीं निदेशालय से जुड़े एक अधिकारी की मानें तो अभी स्कूल के लिए प्रशासक नियुक्त नहीं किया गया है। इसलिए स्कूल पहले की तरह ही चल रहा है। उधर, दिल्ली सरकार की ओर से स्कूल के अधिग्रहण करने के फैसले पर मैक्सफोर्ट अभिभावक एसोसिएशन काफी राहत महसूस कर रही है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद दीक्षित ने बताया कि स्कूल के खिलाफ हम तीन साल से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब जाकर हमारी जीत हो पाई है। अभिभावक तो काफी पहले से चाह रहे थे कि सरकार स्कूल का अधिग्रहण कर ले लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था।
उन्होंने कहा कि अभिभावक पहले से ही इस बात के लिए तैयार थे कि स्कूल का अधिग्रहण होगा इसलिए अभिभावकों को कोई खास परेशानी नहीं है। अभिभावकों के साथ-साथ स्कूल का ज्यादातर स्टाफ भी खुश है क्योंकि अब उन्हें उम्मीद जगी है कि जो स्टाफ अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं वह स्थायी हो जाएंगे।