जेएनयू कैंपस में यूजीसी नोटिफिकेशन 2016 से एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम में सीट कम होने के विरोध में ऐड ब्लॉक पर छात्रों के कब्जे के चलते शिक्षकों के वेतन व टैक्स अपडेट रूक गया है।
ऐड ब्लॉक में छात्रों के कब्जे के कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन अब तक हॉस्टल मैस के कॉट्रेक्टर को बिल के भुगतान सहित अन्य सामानों का ऑर्डर भी नहीं दे पा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में विद्यार्थियों को हॉस्टल मैस में खाना भी नहीं मिल पाएगा। इधर कुलपति ने फिर कहा है कि एमफिल और पीएचडी की सीटों में कटौती नहीं होगी।
जेएनयू कुलपति प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने मीडिया के जरिये बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से ऐड ब्लॉक खाली करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के कारण इमरजेंसी और कई जरूरी सेवाएं भी बाधित हो रही हैं।
छात्रों से बैठकर बातचीत हो सकती है
JNU, DELHI
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छात्रों से बैठकर बातचीत हो सकती है लेकिन वे कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं। कुलपति ने साफ कहा है कि एमफिल में दाखिल छात्रों को पीएचडी में दाखिला मिलेगा। यूजीसी नोटिफिकेशन 2016 से कोई सीट कम नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि ऐड ब्लॉक में जरूरी कागजात व फाइल रखी हुई हैं। इस विरोध के दौरान यदि वे गुम हो जाती हैं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। बृहस्पतिवार को एक महिला प्रोफेसर को इमरजेंसी में दाखिल करने की नौबत आई। लेकिन यूनिवर्सिटी ओर से मेडिकल दस्तावेज की कार्रवाई न होने के कारण अस्पताल में दाखिल नहीं किया।
ऐड ब्लॉक में छात्रों के कब्जे के चलते कोई स्टेंप या कागजात यूनिवर्सिटी के पास नहीं है। कुलपति ने बताया कि छात्रों को दूर-दराज व ग्रामीण इलाकों के आधार पर मिलने वाले नंबर के साथ पहली बार ग्रेस अंक भी मिलेंगे। इसके अलावा एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण पिछले सालों की तरह जारी रहेगा।
यूजीसी नियम नहीं, फैकल्टी बैठक तय करती थी दाखिले
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सूत्रों के मुताबिक, जेएनयू बेशक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, लेकिन यहां पर यूजीसी नियमों की सरेआम अवहेलना होती है। देश के अन्य विवि (डीयू व जामिया भी शामिल) में यूजीसी नोटिफिकेशन 2009 में ही एमफिल व पीएचडी में तय मानकों से दाखिले होते थे, लेकिन जेएनयू में फैकल्टी बैठक में छात्रों की संख्या तय होती थी। यहां पर कुछ शिक्षकों के पास पीएचडी में 30 तो कुछ के पास महज एक या दो स्कॉलर्स भी हैं। ऐसे में शिक्षक अपने पंसद से पीएचडी में छात्र दाखिल कर लेते थे, जिसका विरोध हो रहा है।