डीयू ने शिक्षकों की नियुक्ति और प्रमोशन के लिए यूजीसी के तीसरे व चौथे संशोधन को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को मंगलवार को डीयू की एकेडमिक काउंसिल( एसी) की बैठक में रखा गया था।
वहीं संशोधन को लेकर तदर्थ शिक्षकों के लिए बनी कमेटी की सिफरिशों के लिए रिव्यू कमेटी बनाई गई है और कमेटी को विस्तार दिया जाएगा। अब इस मामले पर अगली बैठक में चर्चा की जाएगी। इस संबंध में डीयू की ओर से मंगलवार देर रात एक रिलीज जारी की गई।
वहीं जहां इस मामले को लेकर बैठक में हंगामा हो रहा था वहीं बैठक के बाहर डूटा के आह्वान पर इस प्रस्ताव के विरोध में शिक्षक धरने पर थे। कार्यकारी परिषद सदस्य प्रो. आर.एन दुबे ने बताया कि नई कमेटी बनेगी जो इसे रिव्यू करेगी।
इस कमेटी में चुने हुए सदस्यों को शामिल किया जाएगा। यूजीसी ने जो प्रस्ताव भेजा है उसमें बदलाव नहीं किया जाएगा, बस थोड़े बहुत बदलाव होंगे। शिक्षकों की नियुक्ति व प्रमोशन के लिए रखे गए प्रस्ताव का 22 सदस्यों ने विरोध किया।
उन्होंने बताया कि बैठक में भगिनी निवेदिता की समस्या, कालिंदी में शिक्षकों को परेशान करने के मामले, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडी में भ्रष्टाचार, अंबेडकर कॉलेज में कई शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव नहीं दिए जाने के मामलों को लेकर भी चर्चा की गई। परिषद सदस्य डॉ. नचिकेता सिंह ने बताया कि बैठक में काफी बहस के बाद तय हुआ कि कमेटी को विस्तार दिया जाएगा।
बैठक के बाहर शिक्षकों का धरना
बैठक के बाहर डूटा के आह्वान पर बुलाए गए धरने में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया। एएडी प्रेस सचिव डॉ. राजेश झा का कहना है कि ऐसे किसी भी बदलाव को हम किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे जो कि शिक्षको के किसी भी पदोन्नति को रोक देगी। उन्होंने यूजीसी के तीसरे और चौथे संशोधन को शिक्षक विरोधी बताया।