दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की दूसरी कटऑफ का स्तर भी ऊंचा ही रहा है। चाहे फिर आउट ऑफ कैंपस कॉलेज हों या नॉर्थ कैंपस कॉलेज। कॉलेजों में पहली कटऑफ के मुकाबले दूसरी में मामूली गिरावट की है। खासकर बीकॉम ऑनर्स में तो औसतन 0.25 फीसदी से लेकर 1.50 फीसदी तक की गिरावट हुई है।
ऐसे में छात्रों समेत अभिभावकों को इस बात की चिंता है कि यदि दूसरी कट ऑफ में सीटों से अधिक दाखिले हो गए तो तीसरी कटऑफ में उनके लिए दाखिले की गुंजाइश नहीं होगी। आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों की कट ऑफ लिस्ट ने छात्रों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें यहां भी दाखिला मिल पाएगा या नहीं।
डीयू में दाखिले के इच्छुक ऐसे छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। अभी शिफ्टिंग के कारण और बीएमएस के गेम चेंजर बनने के कारण उन्हें दाखिले के मौके मिलेंगे। दाखिला लेने के चक्कर में कॉमर्स वाले छात्र भी आर्ट्स में दाखिला ले रहे हैं। लिहाजा आर्ट्स की सीटें जल्दी भर रही हैं। दूसरी कटऑफ के बाद दाखिले हो जाने के बाद ही दाखिलों की सही स्थिति साफ हो पाएगी। जब शिफ्टिंग के कारण खाली सीटों का पता चल सकेगा।
आउट ऑफ कैंपस में अंतिम कट तक रहती है आस
आउट ऑफ कैंपस में कॉलेजों में दाखिले के लिए गौर करने वाली बात यह है कि जहां कैंपस कॉलेजों की पहली और आखिरी कट ऑफ लिस्ट में सिर्फ एक से तीन फीसदी का अंतर देखने को मिलता है, वहीं आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों की आखिरी लिस्ट में पहली लिस्ट के मुकाबले में अंतर आ जाता है। जिसके कारण इन कॉलेजों में अंत तक दाखिले की संभावना बरकरार रहती है।
बीएमएस गेम चेंजर
वहीं डीयू में पांच जुलाई से बीएमएस, बीबीई, व बीबीए की काउंसिलिंग शुरू हो गई, जो कि 10 जुलाई तक चलेगी। ऐसे में खासकर बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडी कोर्स गेम चेंजर साबित होगा। इस कोर्स के चलते सामान्य से लेकर अन्य वर्गों में सीटें खाली होने की आशंका कॉलेज जता रहे हैं। कॉलेजों का मानना है इन कोर्स के कारण कई कोर्सेज से शिफ्टिंग शुरू होगी। इन कोर्स में आवेदन करने वाले ऐसे कई छात्र हैं जिन्होंने अन्य कोर्स में भी दाखिला लिया है। ऐसे में यदि काउंसिलिंग के बाद उनका दाखिला हो जाता है तो वह निश्चित तौर पर अपने पहले वाले दाखिले को रद्द कराऐंगे। ऐसे में सीट खाली ही होंगी।