राजधानी में दिल्ली विकास प्राधिकरण से मिली जमीन पर चल रहे लगभग चार सौ निजी स्कूलों में फीस वृद्घि मामले में सरकार की ओर से निर्णय नहीं आने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्कूल व अभिभावक दोनों ही इस स्थिति में घिरे हुए हैं।
शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2016-17 के लिए इन स्कूलों फीस बढ़ाने के लिए सरकार से मंजूरी लिए जाने का नियम बनाया था। ऐसे में स्कूलों ने इस संबंध में शिक्षा निदेशालय को आवेदन भी किया।
लेकिन अब तक स्कूलों को मंजूरी नहीं मिली है। इससे फीस नहीं ले पाने के कारण स्कूल आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं अब अभिभावकों को डर है कि कहीं उन्हें एक साथ फीस के रूप में मोटी रकम न भरनी पड़ जाए।
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से फीस निर्धारण से जुड़े बिल (दिल्ली स्कूल वेरिफिकेशन ऑफ एकाउंट्स एंड रिफंड ऑफ एक्सेस फीस बिल-2015) को केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है, इकसे बावजूद बिना मंजूरी के इसे दिल्ली सरकार लागू कर चुकी है। जो संवैधानिक मान्यताओं का उल्लंघन है। वहीं, सरकार ने खातों की जांच के नाम पर 600 से ज्यादा सीए का पैनल तैयार करके स्कूलों का वेरिफिकेशन शुरू किया है।
पिछले चार महीने से स्कूल प्रबंधन फीस लेने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यदि किसी स्कूल के बारे में उचित शिकायत मिलती है तो उसके बारे में सरकार निरीक्षण करके कदम उठा सकती है।