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Delhi NCR News: कैमरा पकड़ेगा प्रदूषण, एआई देगा अलर्ट, मौके पर पहुंचेगी टीम

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प्रदूषण का इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शुरू हुआ, 700 से अधिक निर्माण स्थलों की लाइव निगरानी
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जीपीएस से वाहनों और रोड स्वीपिंग मशीनों की ट्रैकिंग, बॉडी कैमरों से कार्रवाई की होगी लाइव

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में प्रदूषकों की नब्ज पकड़ने के लिए एआई तकनीक से लैस एक कमांड रूम तैयार हुआ है। शास्त्री पार्क में डीपीसीसी ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया है, जो कैमरों, एआई, सेंसर, जीपीएस और फील्ड टीमों के गठजोड़ से प्रदूषण की पहचान कर कार्रवाई और उसके सत्यापन की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत इस सेंटर को शुरू किया। यह सेंटर डिटेक्ट, एनालाइज, एक्ट, वेरिफाई के सिद्धांत पर काम करेगा।

आईसीसीसी को प्रदूषण नियंत्रण का केंद्रीय निगरानी केंद्र बनाया गया है। यहां दिल्ली के एक्यूआई स्टेशनों से मिलने वाला डाटा, पिछले वर्षों के प्रदूषण आंकड़े और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के कारणों से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी। कैमरों और एआई आधारित तकनीक से निर्माण स्थलों, खुले में कचरा या बायोमास जलाने जैसी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। किसी इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ने या नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर सिस्टम संबंधित टीम और विभाग तक अलर्ट पहुंचाएगा।
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700 से ज्यादा निर्माण साइट पर 24 घंटे नजर
500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली 700 से ज्यादा निर्माण साइट्स की एआई और सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे लाइव निगरानी की जा रही है। किसी निर्माण स्थल के आसपास पीएम10 का स्तर बढ़ने पर संबंधित विभाग और साइट मालिक को तत्काल सूचना दी जाएगी। इससे केवल प्रदूषण होने के बाद निरीक्षण करने के बजाय संभावित स्रोत पर तुरंत कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। आईसीसीसी की सबसे अहम कड़ी फील्ड टीमों से इसका जुड़ाव है। प्रदूषण हॉटस्पॉट या नियम उल्लंघन की पहचान होने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए सूचना दी जाएगी। इस सर्दी में 78 सब-डिविजन स्तर की टीमें निगरानी और प्रवर्तन में लगाई जाएंगी।


बॉडी कैमरा बताएगा मौके पर क्या हुआ
वायुदूत टीमों के बॉडी कैमरों को भी कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। डीपीसीसी के अधिकारी जब उद्योगों या प्रदूषणकारी साइट्स का निरीक्षण करेंगे तो बॉडी कैमरे से कार्रवाई रिकॉर्ड होगी। इससे मौके पर हुई कार्रवाई की निगरानी और बाद में उसका सत्यापन संभव होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए चल रही मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों को जीपीएस से जोड़ा गया है।
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सर्दियों में 24 घंटे वॉर रूम की तरह काम करेगा
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सेंटर निर्धारित छह माह की समयसीमा से पहले तैयार किया गया है। सर्दियों में यह 24 घंटे ये वॉर रूम की तरह काम करेगा। आईसीसीसी में अलग-अलग शिफ्ट में अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ प्रदूषण का डाटा जुटाना नहीं, बल्कि उसे तत्काल फील्ड कार्रवाई और मापने योग्य परिणाम में बदलना है।
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