फरीदाबाद में बाहर से बिजली खरीदने की योजना यानी ओपन एक्सेस की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को लेकर बिजली निगम और उद्योगपतियों के बीच जंग छिड़ गई है।
इस योजना के तहत राज्य के बाहर से बिजली खरीदने वाली कंपनियों को हर माह बिजली निगम से एनओसी लेनी पड़ती है। उद्योगपतियों का आरोप है कि यह एनओसी नहीं दी जा रही है। अधिकारी न तो हां कर रहे हैं और न तो ना। जबकि आवेदन के तीन दिन के भीतर एनओसी मिल जानी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर उद्योगपतियों ने बिजली निगम के अधिकारियों एवं हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन आरएन पाराशर से आपत्ति दर्ज कराई है।
फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) के कार्यकारी निदेशक शैलेंद्र कपूर का कहना है कि असल में बिजली निगम अपनी सरप्लस बिजली महंगे दामों पर उद्योगों को बेचना चाहता है इसलिए वह एनओसी नहीं दे रहा। क्योंकि ओपन एक्सेस के तहत उन्हें बिजली निगम के मुकाबले 50 फीसदी सस्ती बिजली मिल रही है।
कपूर के मुताबिक संगठन ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन से कहा है कि ओपन एक्सेस विद्युत एक्ट-2003 के प्रावधानों के तहत है। इसलिए इसके जरिए उद्योगों को बिजली लेने से निगम वंचित करने की कोशिश मत करे।
-पूरे प्रदेश में इस योजना के तहत 208 यूनिटें बिजली ले रही हैं।
-इसमें फरीदाबाद के 72 उद्योग शामिल हैं।
-फरीदाबाद के 28 उद्योगों ने एनओसी के लिए आवेदन किया हुआ है।
हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के अधीक्षण अभियंता एमसी त्यागी ने कहा कि कोई न कोई लीगल अड़चन आ रही होगी तभी मुख्यालय स्तर पर एनओसी फंसी होगी। हमारे साथ उद्योगपतियों की मासिक बैठक होती है, क्या उसमें कभी उद्योगपतियों ने यह मुद्दा उठाया। हमारे पास तो पंचकूला से आदेश आते हैं उसी के आधार पर हम काम करते हैं। यह मुद्दा मुख्यालय स्तर का है।