भले ही जाट आरक्षण आंदोलन शांत हो गया है। बावजूद अभी भी रोडवेज निगम अपनी बस सेवा सुचारू रूप से शुरू नहीं कर पाया है। काफी जद्दोजहद के बाद दोपहर में चंडीगढ़ रूट पर सिर्फ एक बस रवाना हो पाई।
आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गुडग़ांव, बुलंदशहर और ग्रामीणों रूटों पर 40 बसें चलाई गई। हालांकि अभी भी रोहतक, हिसार, कैथल रूट पर रोडवेज बसें नहीं चल पाई है।
पिछले सात दिन से रोडवेज की बस सेवा बुरी तरह से प्रभातिव है। आलम है कि 200 बसों में औसतन 30 से 40 बसें ही रवाना हुई। वह भी लोकल रूटों पर।
आंदोलन के दिनों में रोडवेज की बसें एक लाख 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय नहीं कर पाई। जिसके कारण फरीदाबाद डिपो को करीब 36 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। मंगलवार को डिपो महाप्रबंधक ने रोडवेज मुख्यालय को इस बारे में रिपोर्ट भेजी।
रूट पर नहीं है बसें
फरीदाबाद डिपो की मेन और सिटी रूट पर करीब 200 बसों का बेड़ा है। इन बसों में 15 बसें रोहतक, हिसार होते हुए सिरसा तक जाती है। जबकि वाया गुडग़ांव झज्जर जाने वाली बसों की संख्या भी 15 है।
इसी तरह कैथल, यमुनानगर, करनाल एक-एक बस चलती है। जबकि हर रोज चंडीगढ़ 19 बसें संचालित होती है। जाट आरक्षण आंदोलन के चलते रोहतक, झज्जर, कैथल, चंडीगढ़ की बस सेवा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इन रूटों पर सही रूप से नहीं चल पा रही है।
चालक-परिचलकों ने खड़े किए हाथ
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक रोहतक रूट पर रविवार को दस बसें गई थी, वो आज तक वापस नहीं आ पाई। इसी तरह झज्जर रूट पर भी आठ बसें फंसी हुई हैं।
इसी तरह पांच बसें चंडीगढ़ डिपो में खड़ा किया गया है। शिमला, कटरा, हमीरपुर, देहरादुन गई बसें भी अपने गंतव्य स्थान पर खड़ी है। आंदोलन को शांत होता देख मंगलवार को डिपो अधिकारियों ने अलग-अलग जगहों पर खड़ी बसों के चालक-परिचालकों से फोन पर संपर्क साधा और डिपो आने के लिए कहा।
लेकिन, आंदोलन की तपिश देख चालक-परिचालकों ने डिपो आने से हाथ खड़े कर दिए। चालक-परिचालकों के डिपो नहीं आने से बस सेवा प्रभावित हो रही है।