दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा
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जानकार मानते हैं कि इंस्पेक्टर व युवक की मौत .32 बोर के हथियार से हुई है। यह हथियार किसी का लाइसेंसी हैं या नकली, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। बात यह भी चली कि इंस्पेक्टर के पास भी निजी लाइसेंस रिवाल्वर थी। वह घटना के बाद से ही गायब है। किस हथियार से गोली चली, इसका खुलासा तभी होगा जब हथियार मिलने के बाद उसकी जांच होगी।
.32 बोर आम नागरिकों के लिए है
जानकार बताते हैं कि पुलिस के पास .38 बोर के हथियार होते हैं। आम लोगों के लिए यह हथियार प्रतिबंधित होता है। जो लोग लाइसेंस बनवाते हैं, उन्हें .32 बोर की पिस्टल या रिवाल्वर ले सकते हैं। पिस्टल कोलकाता की आर्डिनेंस फैक्टरी जबकि रिवाल्वर कानपुर की आर्डिनेंस फैक्टरी में बनती है। इसके अलावा जिनके पास आर्म्स दुकान का लाइसेंस होता है, वहां से भी खरीदा जा सकता है।
पुलिस निजी हथियार भी ले जा सकती
जानकारों ने बताया कि अगर किसी के पास लाइसेंसी निजी हथियार है तो वह ड्यूटी के वक्त अपने पास रख सकता है। चूंकि शुरू में यह बात उठी कि इंस्पेक्टर के पास निजी लाइसेंसी रिवाल्वर थी, वह घटना के बाद से गायब है। रिटायर्ड डीएसपी केके गौतम का कहना है कि आत्म सुरक्षा के लिए ही लाइसेंस ली जाती है। चाहे पुलिस कर्मी हो या आम आदमी, वह अपने पास रख सकता है।